ये हैं भारत की महान रानियां, जिनकी बहादुरी के चर्चे आज भी सुने जाते हैं…

देश में महान राजाओं को तो याद रखा जाता है लेकिन लोग ये भूल जाते हैं कि भारत में कई महान रानियां भी हुई हैं. इन रानियों के त्याग, बलिदान और वीरता के किस्से किसी राजा से कम नहीं थे. वक्त पड़ने पर भारत की रानियों ने अपनी बहादुरी का परिचय दिया है. ऐसे में आज जानते हैं इन्हीं महान रानियों के बारे में…

रानी दुर्गावती
वीरांगना महारानी दुर्गावती का जन्म 1524 में हुआ था. राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से उनका विवाह हुआ था. दुर्भाग्यवश विवाह के 4 वर्ष बाद ही राजा दलपतशाह का निधन हो गया. जिसके बाद रानी ने खुद गढ़मंडला का शासन संभाल लिया. वर्तमान जबलपुर उनके राज्य का केंद्र था. दुर्गावती के इतिहास काफी वीरतापूर्ण रहा. उन्होंने मुस्लिम शासकों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया और कई बार उन्हें पराजित किया था.

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई
भारत में जब भी महिलाओं के सशक्तिकरण की बात होती है तो महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की चर्चा जरूर होती है. आपने शायद ही किसी ऐसे भारतीय के बारे में सुना होगा जो झांसी की रानी के बहादुरी भरे कारनामे सुनते-सुनते न बड़ा हुआ हो. झांसी की रानी सन 1857 के विद्रोह में शामिल रहने वाली प्रमुख शख्सियत थीं. 1858 में ब्रिटिश सरकार ने झांसी पर हमला कर उसको घेर लिया और उस पर कब्जा कर लिया, लेकिन रानी ने हार नहीं मानी. उन्होंने पुरुषों की पोशाक धारण की, अपने पुत्र को पीठ पर बांधा और दोनों हाथों में तलवारें लीं और घोडे़ पर सवार हो गईं. घोड़े की लगाम अपने मुंह में रखी और युद्ध करते रही. 22 साल की महानायिका लक्ष्मीबाई लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गईं.

चार बार दिवालिया हो चुके हैं डोनाल्ड ट्रंप, जानिए अमेरिकी राष्ट्रपति की जिंदगी से जुड़ी रंगीन बातें

रानी चेन्नम्मा
रानी चेन्नम्मा उन भारतीय शासकों में से हैं जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए सबसे पहली लड़ाई लड़ी थी. 1857 के विद्रोह से 33 साल पहले ही दक्षिण के राज्य कर्नाटक में शस्त्रों से लैस सेना के साथ रानी ने अंग्रेजों से लड़ाई की और वीरगति को प्राप्त हुईं. आज भी उन्हें कर्नाटक की सबसे बहादुर महिला के नाम से याद किया जाता है.

रानी कर्णावती
चित्तौड़ के शासक महाराणा विक्रमादित्य को कमजोर समझकर गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह ने राज्‍य पर आक्रमण कर दिया था. राणा सांगा की पत्नी राजमाता कर्णावती को जब ये पता चला तो वे चिंतित हो गईं. इसलिए मेवाड़ की लाज बचाने के लिए उन्होने मुगल साम्राट हुमायूं को राखी भेजी और सहायाता मांगी. हुमायूं ने राखी का मान रखा. लेकिन जब तक हुमायूं फौज लेकर चित्तौड़ पहुंचा तो वहां बहादुरशाह की जीत और रानी कर्णावती का जौहर हो चुका था. कर्णावती ऐसी महान राजपूत रानी थी, जिन्‍होंने जौहर में जान दे दी, पर घुटने नहीं टेके.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं की झांसी वर्तमान में किस राज्य में है.

(Visited 363 times, 1 visits today)

सुझाव कॉमेंट करें

About The Author

आपके लिए :