मुस्‍ल‍िम बच्‍चों को टीका लगवाकर नपुंसक बना रही है मोदी सरकार?

क्या देश में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इशारे पर मुसलमानों को नपुंसक बनाने वाला इंजेक्शन दिया जा रहा है? क्या छोटी चेचक को मिटाने के नाम पर मुसलमानों को मिटाने की साजिश रची जा रही है? आखिर क्या है हिंदुस्तान में मुसलमानों को नपुंसक बनाने वाले टीके का सच? क्या मुसलमानों के खिलाफ कोई इंजेक्शन तैयार किया गया है? क्या नसों में छेद करती सुई के सहारे खून में उतरने वाली कोई दवा मुस्लिमों को नपुंसक बनाने की साजिश है? क्या बीमारी से बचाने वाला कोई टीका मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ोतरी को रोक सकता है? क्या हिंदुस्तान में मुसलमानों को नपुंसक बनाने वाला कोई टीका स्कूलों में भेजा जा रहा है? इन सवालों को सुनकर आप चौंक गए होंगे. आप चाहे हिंदू या मुसलमान इन सवालों ने आपको परेशान कर दिया होगा? कुछ सेकेंड के भीतर आप ये सोचने लगे होंगे कि ऐसे सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? इन सवालों के पीछे एक तस्वीर है और तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा. दरअसल, सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मैसेज काफी वायरल हो रहा है. जिसमें मुसलमानों से अपील की जा रही है कि वह अपने बच्चों को खसरा-रूबेला और चेचक के टीके नहीं लगवाएं. मैसेज में दावा किया गया है कि इन टीकों के जरिए आरएसएस और मोदी सरकार मुसलमान बच्चों को नपुंसक बनाने की साजिश रच रही है.

सोशल मीडिया पर वायरल एक मैसेज के जरिए बेहद गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं. और आरोप एक नहीं है कई हैं. पहला आरोप ये है कि एक दवा जो दुनिया भर में बैन हो चुकी है उसे हमारे देश के बच्चों को दिया जा रहा है. दूसरा आरोप ये है कि मुसलमानों को नपुंसक बनाने की साजिश हो रही है. और इन सबके लिए मोदी सरकार और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. लेकिन हमारे देश के लोगों को भी सच्चाई जाननी बेहद जरूरी है और आज हम देश के लोगों के लिए इस वायरल मैसेज की सच्चाई सामने लाने वाले हैं. साथ ही दोस्तों आप भी इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि आपके दोस्तों और रिश्तेदारों को भी इस वायरल मैसेज की सच्चाई जान पता चल सके.

यहां बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल ये मैसेज पूरी तरह से बेबुनियाद है. मैसेज में दी गई बातों पर गौर करें तो कई बातें गलत साबित हो चुकी हैं. मैसेज में दावा है कि नपुंसक बनाने वाला टीका स्मॉल पॉक्स के नाम पर दिया जा रहा है. जबकि सच्चाई ये है कि टीके का स्मॉलपॉक्स से कोई लेना देना नहीं है. दूसरा दावा किया गया कि दुनिया भर में एमआर वैक बैन है लेकिन सच्चाई ये है कि एमआरवैक दुनिया भर में बच्चों को खसरे और रुबेला से बचाने के लिए दी जा रही है.

खसरा एक संक्रामक बीमारी है जो खांसने या छींकने से फैलती है. ये वायरस इतना खतरनाक है कि बच्चे की जान ले लेता है. सरकार इस बीमारी से आपके बच्चों को बचाने के लिए एक कैंपेन चला रही है ताकि आपके बच्चे सुरक्षित रह सकें. लेकिन सोशल मीडिया पर इसे सांप्रदायिक रंग चढ़ा के पेश किया जा रहा है. वहीं मुस्लिम समाज में शैक्षणिक पिछड़ापन अभी भी बहूत ज्यादा है. जिसके कारण लोग फर्जी मैसेज के जरिए मुस्लिम लोगों को ज्यादा निशाना बनाते हैं. वायरल मैसेज के जरिए कुछ गंदी मानसिकता के लोग हमारे देश में ना सिर्फ नफरत और डर फैलाने का काम कर रहे हैं बल्कि उन परिवार और बच्चों की जिंदगी से भी खेल रहे हैं तो ऐसे मैसेज में फंसकर अपने बच्चों को टीका लगवाने से इनकार कर देते हैं. साथ ही देश की सरकार भी मुसलमानों को नपुसंक बनाने के लिए कोई टीका नहीं लगा रही है.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि आप इन फर्जी मैसेज की रोकथाम के लिए क्या करते हैं?

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