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खबरदार! अब पैकेट वाला दूध पीने से पहले 100 बार सोच लो!

देश ही नहीं दुनिया में भी दूध बेहद पॉपुलर है, दूध की डिमांड किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं है. आखिर हो भी क्यों न... शारीरिक और मानसिक विकास के लिए दूध बेहद जरूरी जो है. अब मार्केट में दो तरह का दूध आता है, एक तो पैकेट वाला और एक जो दूधवाला देकर जाता है. दोस्तों, क्या आपको पता है कि मार्केट वाला यानी पैकेट वाला दूध कैसे बनता है? चलिए हम आपको बताते हैं कि पैकेट वाला दूध कैसे तैयार होता है, साथ ही पैकेट वाले दूध में और डेयरी वाले दूध में क्या अंतर है?

इस प्रक्रिया में सबसे पहले आती है दूध निकालने की प्रक्रिया. इसमें दूध कंपनियों के जरिए मशीनों को गाय या भैंस के थन में लगाकर दूध निकाला जाता है. दूध निकालने के बाद उसे एक बड़े से कंटेनर में भर लिया जाता है. दूध को निकालकर उसे लैब ले जाया जाता है, जहां पर दूध की जांच होती है कि दूध में कितना फैट, सॉलिड या डेनसिटी है. इसके बाद कंपनियों के जरिए दूध की ग्रेडिंग की जाती है, जिसके आधार पर दूधवालों को पैसे दिए जाते हैं.

दूध को उत्पादकों से खरीदने के बाद कंपनियों के जरिए बड़े- बड़े कंटेनर में भरकर प्रोसेसिंग प्लांट में लाया जाता है, जिसमें दूध को पैकेट में भरने की प्रक्रिया को शुरू किया जाता है. दूध को प्रोसेसिंग प्लांट में लाकर सबसे पहले मशीन में रखा जाता है, साथ ही उसे लगातार मिक्स किया जाता है, जिससे वह जम न
जाए. इसी के साथ मिक्स करने के प्रक्रिया के दौरान फेट युक्त दूध और टोंड मिल्क को अलग किया जाता है. इसके बाद दूध को गर्म करने की बारी आती है. दूध को लगभग 40 डिग्री तापमान तक गर्म किया जाता है, जिससे दूध खराब न हो और बैक्टीरिया मर जाएं.

इसके बाद दूध को ग्लास पाइप की मदद से एक कंटेनर में डाला जाता है, इस कंटेनर में दूध में विटामिन ए और डी मिक्स किया जाता है. इसके तुरंत बाद दूध की पैकिंग प्रक्रिया शुरू होती है. दूध की पैकिंग प्रक्रिया में कंपनियां के लेबल के साथ वाली पॉलीथिन पैकेट का इस्तेमाल किया जाता है, मशीन के जरिए इन पॉलीथिन के पैकेटों में दूध भरा जाता है. साथ ही उसे तुरंत बंद कर दिया जाता है, जिससे दूध में किसी भी तरह का कोई बैक्टीरिया न जाए. अब दूध मार्केट में जाने के लिए तैयार है, कंपनियों के जरिए इसे टोंड और फूल क्रीम में बांटकर मार्केट में भेज दिया जाता है.

दोस्तों, पैकेट दूध के साथ सबसे चौंकाने वाली बात का खुलासा FSSAI की रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक पैकेट दूध के 40 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरतें हैं. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि दूधवाले दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं. साथ ही कंपनियां दूध की अवधि बढ़ाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब यह है कि दूध भी आज के समय में प्योर नहीं है. दोस्तों, कमेंट कर जरूर बताएं कि दूध किस-किस जानवर से हासिल हो सकता है.