अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी में ये हैं 5 बड़े अंतर…!

भारतीय जनता पार्टी ने अब तक देश को दो प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी दिए हैं. ऐसे में अक्सर ही दोनों नेताओं की उनके काम के आधार पर तुलना की जाती है. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटर बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं हैं. अटल बिहारी वाजपेयी के वक्त जहां गठबंधन की सरकार थी तो नरेंद मोदी की सरकार में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है. हालांकि नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी में कई अंतर भी मौजूद हैं. आइए जानते हैं दोनों नेताओं के बीच मौजूद अंतर के बारे में…

स्वभाव
विरोधियों को जवाब देने में अटल बिहारी वाजपेयी जहां थोड़े नरम स्वभाव के थे तो वहीं नरेंद्र मोदी थोड़े आक्रामक स्वभाव के हैं. अटल बिहारी वाजपेयी अपने विरोधियों पर भी प्यार और नरम तरीके से निशाना साधते थे लेकिन नरेंद्र मोदी इस मामले में थोड़े आक्रामक दिखाई देते हैं और विरोधियों को कड़वी बातें भी कह देते हैं. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अटल जी ने अपने कार्यकाल में पाकिस्तान की तरफ खुद दोस्ती का हाथ बढ़ाया था लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान को हर वक्त ईंट का जवाब पत्थर से देने की नीति अपनाकर रखी.

कूटनीति
नरेंद्र मोदी कूटनीति के अच्छे जानकार हैं. जबकि अटल बिहारी वाजपेयी का कूटनीति में ज्यादा भरोसा नहीं रहा. अटल जी कूटनीति से दूर रहते थे.

प्रचार
नरेंद्र मोदी को खुद का, पार्टी का और सरकार का प्रचार करना बखूबी आता है. नरेंद्र मोदी को मार्केटिंग में महारत हासिल है. मोदी पुरानी योजनाओं का भी नए तरीके से प्रचार कर उन्हें लोकप्रिय बना देने में काबिल नेता हैं. वहीं अटल बिहारी वाजपेयी इस मामले में थोड़े पीछे रह गए. अटल बिहार खुद का, पार्टी का और सरकार का सीमित प्रचार ही करते थे.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ये खास बातें काफी रोचक हैं…!

विपक्ष का सम्मान
अटल जी विपक्ष का पूरा सम्मान करते थे. संसद में विपक्ष को बोलने का भरपूर मौका देते थे. लेकिन नरेंद्र मोदी इससे बिल्कुल उलट हैं. मोदी सरकार में आए दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अनाब शनाब बयानबाजी देखने को मिल जाती है. मोदी सरकार में संसद में भी हंगामे के कारण विपक्ष को बोलने का मौका कम मिलता है.

कथनी और करनी
अटल बिहारी सिद्धान्तों का काफी ध्यान रखते थे. वो जो कहते थे वो कर के दिखाते थे. लेकिन नरेंद मोदी आज के दौर में सिद्धान्तों को ज्यादा मायने नहीं देते हैं. उनकी कथनी और करनी में अंतर मिल जाएगा.

दोस्तों, नीचे कमेंट कर आप भी अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के बारे में कोई एक अंतर जरूर बताएं…

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