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कोई नहीं जानता 'क्रिसमस' के बारे में ये हैरान करने वाली बातें, क्रिसमस पर पेड़ की सजावट के पीछे छुपा है बड़ा राज!

कोई नहीं जानता 'क्रिसमस' के बारे में ये हैरान करने वाली बातें, क्रिसमस पर पेड़ की सजावट के पीछे छुपा है बड़ा राज!
दिसंबर महीना लोगों के लिए काफी खास होता है. क्योंकि यह महीना साल का आखिरी महीना होता है. इस महीने के तुरंत बाद एक नया साल शुरू हो जाता है. साथ ही दिसंबर के महीने में क्रिसमस का त्योहार भी आता है. ईसाई धर्म के लोगों के लिए क्रिसमस का त्योहार काफी अहम माना जाता है. हर साल 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है. इस त्योहार पर गिफ्ट्स का लेन देन भी काफी किया जाता है वहीं घर को भी काफी अच्छे से सजाया जाता है. क्रिसमस के त्याहोर से पहले इसको लेकर तैयारियां जोरो शोरो से चलती है. वहीं क्रिसमस के त्योहार पर क्रिसमस ट्री भी काफी अहम रहता है. क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री को रंग-बिरंगी लाइट्स से सजाया जाता है. क्रिसमस डे के सेलिब्रेशन पर पेड़ों को सजाने का इतिहास सैकड़ों साल से ज्यादा पुराना है. इस फेस्टिवल से पहले ईसाई धर्म के लोग लकड़ी से क्रिसमस ट्री तैयार करते हैं और फिर इसे डेकोरेट करते हैं. 2019 में चुनाव जीतने के लिए मोदी ने GST में किया बड़ा हेरफेर, हर भारतीय को ये खबर जाननी जरूरी क्रिसमस ट्री का ईसाइयों के सेलिब्रेशन से खास जुड़ाव है. जिसे प्रभु की ओर से लंबे जीवन का दिया जाने वाले आशीर्वाद के रूप में माना जाता है. प्राचीन काल में क्रिसमस ट्री को जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता था. मान्यता थी कि इसे सजाने से घर के बच्चों की आयु लम्बी होती है. इसी कारण क्रिसमस डे पर क्रिसमस ट्री को सजाया जाने लगा. कहते हैं, हजारों साल पहले उत्तरी यूरोप में इसकी शुरुआत हुई थी, जब क्रिसमस के मौके फर ट्री यानी सनोबर को सजाया गया. इसे चेन की मदद से घर के बाहर लटकाया जाता था. ऐसे लोग जो पेड़ को खरीद पाने में अमसर्थ थे वे लकड़ी को पिरामिड आकार देकर सजाते थे. लेकिन क्या आपको इससे जुड़ी कुछ खास बातें पता हैं. नहीं... तो आइए जानते हैं 'क्रिसमस ट्री' से जुड़ी खास बातों के बारे में जिन्हें आपने आज तक नहीं सुनी होगी... एक मान्यता के मुताबिक क्रिसमस ट्री को क्रिसमस पर सजाने की परम्परा जर्मनी से प्रारम्भ हुई. यहां से 19वीं सदी से यह परम्परा इंग्लैंड में पहुंची, जहां से सम्पूर्ण विश्व में यह प्रचलन में आ गई. वैसे तो क्रिसमस ट्री की कहानी प्रभु यीशु मसीह के जन्म से है. जब उनका जन्म हुआ तब उनके माता-पिता मरियम और जोसेफ को बधाई देने वालो ने, जिनमें स्वर्गदूत भी थे, एक सदाबहार फर को सितारों से रोशन किया था. तब से ही सदाबहार क्रिसमस फर के पेड़ को क्रिसमस ट्री के रूप में मान्यता मिली. 25 दिसम्बर से पहले क्रिसमस की जो सबसे अहम तैयारी है उनमें एक क्रिसमस ट्री की सजावट भी है. बड़े-बच्चे-बुजुर्ग सभी क्रिसमस वृक्ष की सजावट में जुट जाते हैं. इन वृक्षों पर मोमबत्तियों, टॉफियों और बढ़िया किस्म के केक को रिबन और कागज की पट्टियों से बांधा जाता है. वहीं क्रिसमस ट्री पर छोटी-छोटी मोमबत्तियां लगाने का प्रचलन 17वीं शताब्दी से शुरू हो गया था. प्राचीन काल में क्रिसमस ट्री को जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता था. मान्यता थी कि इसे सजाने से घर के बच्चों की आयु लम्बी होती है. इसी कारण क्रिसमस डे पर क्रिसमस वृक्ष को सजाया जाने लगा. माना जाता है कि इसे घर में रखने से बुरी आत्माएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि सांता क्लोज की दाढ़ी का रंग कौनसा होता है?