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कोरोना पर चीन की मीडिया की झूठी रिपोर्ट के कारण दुनिया में मची तबाही

by Gwriter

दोस्तों, इस समय हर जगह कोरोना वायरस का कहर है. कोरोना नाम के इस वायरस ने दुनिया के 185 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले लिया है. इस वायरस के कहर ने अमेरिका जैसे देश के भी हाल खराब कर दिए हैं. इटली और स्पेन में तो इस वायरस ने सरकार का हौसला तक तोड़ दिया है. लेकिन इतने सब के बावजूद जहां से यह वायरस पैदा हुआ वहां के हालत धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं. जी हां, हम बात चीन की कर रहे हैं, जहां से ये वायरस फैला था. चाइना ने दावा किया है कि उसने कोरोना को अपने देश में फैलने से रोक लिया है. दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश ने आखिर यह कैसे किया होगा? आप यही सोच रहे होंगे? तो आपको जानकर हैरानी होगी कि चीन का यह दावा किसी छलावे से कम नहीं है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हर भाषण में चाइना के कोरोना से जुड़े आंकड़ों पर आपत्ति जताई है. कोरोना महामारी को लेकर दिए गए एक भाषण में तो उन्होंने चीन के इस वायरस से पीड़ित लोगों के आकड़ों को फर्जी तक करार कर दिया है. लेकिन दोस्तों, चीन ने यह पहली बार नहीं किया है जब चीन की रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं. पहले भी कई बार चीन ने झूठी रिपोर्ट्स और बिना सिर पैर के तर्क दिए हैं. चलिए आज हम चीन की कोरोना से लेकर पिछली कई झूठी रिपोर्टों के बारे में जानते हैं?

दोस्तों, कोरोना महामारी से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. कुछ देशों ने तो इस महामारी के सामने मानों अपने घुटने ही टेक दिए हों. तो वहीं कुछ देशों की लड़ाई अभी भी जारी है. लेकिन चीन में पैदा हुए इस वायरस को लेकर कई तरह की रिपोर्ट दुनिया भर के मीडिया संस्थानों ने दी है. चीन के सरकारी मीडिया चैनल ग्लोबल टाइम्स पर शुरुआत से ही कोरोना को लेकर रिपोर्ट और आंकड़ों में बदलाव करने का आरोप लगता रहा है. ऐसे में कई चीजें ऐसी हैं जिससे कोरोना को लेकर चीन का दोहरा चेहरा नजर आता है. दोस्तों, चीन के मीडिया संस्थानों ने पहले तो इस वायरस का जन्म दिसंबर में होना बताया था. लेकिन चीन के मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट और डॉक्टरों के चैक अप में इस महामारी की शुरूआत नवंबर के महीने से ही हो गई थी. चीन ने दिसंबर में अपना पहला केस भी डिस्कवर कर लिया था. लेकिन इसके बावजूद दुनिया को इस वायरस के बारे में जनवरी में जाकर जानकारी दी गई.

दोस्तों, चाइना के मीडिया संस्थानों द्वारा दी गई रिपोर्ट में यह बताया गया था कि जनवरी में हमारे देश में कोरोना के मामले मिलने की शुरुआत हुई है, जिसके मद्देनजर सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा की. लेकिन ऐसा नहीं है. चीन ने लॉकडाउन की घोषणा तब की जब वहां पर इस वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी देखी गई. चीन ने दुनिया को भी इस वायरस के बारे में दो महीने बाद बताया. अगर चाइना दिसंबर में मिले मरीज की जानकारी दुनिया को दे देता तो शायद इस महामारी से पीड़ित लोगों की संख्या कुछ और ही होती.

दोस्तों, चाइना के जरिए 4 अपैल 2020 को जारी किए गए आकड़ों में इस वायरस के घरेलू फैलाव को काबू पाने की बात कही गई थी. चाइना के जरिए जारी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस महामारी के मामलों में अब बाहर से आए लोगों के कारण बढ़ोत्तरी हुई है. लेकिन इस रिपोर्ट को अमेरिका ने नकार दिया. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि चाइना झूठे आंकड़े पेश कर दुनिया को गुमराह कर रहा है. हालांकि चीन ने इस चीज को साबित करने के लिए कई तरह की तस्वीर और इंडस्ट्रीज, मेट्रो के शुरू होने संबंधी वीडियो भी जारी किए थे. ट्रंप का कहना है कि चाइना दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि हमने इस वायरस पर विजय हासिल कर ली है. लेकिन अभी भी चाइना के लाखों लोगों के फोन बंद आ रहे हैं, तो वो सारे लोग कहां चले गए? इसको लेकर चीन ने कुछ संतोषजनक जवाब नहीं दिया.

चीन के वुहार शहर से निकले इस वायरस ने दिसंबर से ही तबाही मचाना शुरू कर दिया था, लेकिन चाइना ने इस बात की जानकारी डब्लयूएचओ को पूरे एक महीने बाद दी. दोस्तों, इसी के साथ जनवरी तक चाइना यही दावा करता रहा कि यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं जाता है. साथ ही इस वायरस को लेकर आवाज उठाने वाले डाक्टरों का मुंह भी बंद कर दिया गया. केस मिलने के बाद भी वुहार शहर को 23 जनवरी यानी पूरे एक महीने बाद बंद किया गया. इस दौरान वहां से लोग आते जाते रहे और दुनिया में इस वायरस का विस्तार होता रहा. जब दुनिया ने ऐसी लापरवाही करने की वजह पूछनी शुरू की तो चाइना से इस वायरस को लेकर सख्ती करने और इससे लड़ने की तस्वीर सामने आने लगी. वुहार शहर में जब अस्पताल के बेड कम पड़ने लगे तो चाइना ने 10दिनों में 1000 वेड वाला अस्पताल बनाकर दुनिया के सामने इस वायरस को लेकर संजीदा होने का नाटक किया. ऐसा चीन ने इसलिए भी किया जिससे दुनिया को लगे कि चीन इस वायरस को लेकर काफी सख्त है.

दोस्तों, जब चीन के वेट मार्केट से इस वायरस के पैदा होने की खबरें आने लगी तो सरकार ने वहां के सभी वेट मार्केट को बंद कर दिया. वहां की मीडिया ने दुनिया को यह दिखाना शुरू कर दिया कि कोरोना के संकट से लड़ने में सरकार और चीन के लोग काफी मेहनत कर रहे हैं. लेकिन असल में यह किसी प्रोपोगेंडा से कम नजर नहीं आता है.

दोस्तों, अमेरिका की एक खुफ़िया एजेंसी ने चीन द्वारा जारी आंकड़ों का पर्दाफाश किया है, अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने दुनिया के सामने गलत आंकड़ें पेश किए हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री ने तो कई बार अपने संबोधन में चीन के आंकड़ों को गलत भी ठहराया है. वहीं डोनाल्ड ड्रंप ने तो इसे चाइना वायरस बुलाने से भी परहेज नहीं किया. दोस्तों, चीन के आंकड़ों पर सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि चाइना ने बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित मरीजों को पहले लिस्ट से बाहर रखा और फिर जब दुनिया भर से खबरें आने लगी तो अपने यहां के आंकड़ों में फेरबदल करना शुरू कर दिया. चाइना ने संक्रमण की सूची में 1500 ऐसे मरीजों को शामिल कर लिया, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखे थे. लेकिन वह कोरोना संक्रमित थे. दोस्तो, चीन ने कोरोना को लेकर हमेशा ही गोल मोल चीजे दुनिया के सामने पेश की हैं.

दोस्तों, अब आप सोच रहे होंगे कि चीन को आंकड़े कम दिखाकर या अपने यहां कि स्थिति छुपा कर क्या हासिल होगा? तो आपको जानकर हैरानी होगी कि महामारी के समय भी चाइना अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जुगत में लगा है. चीन ने जनवरी 2020 में लॉकडाउन लागू किया था और अप्रैल 2020 में कुछ जगहों से लॉकडाउन हटा दिया. ऐसे में दुनिया के सामने यह तस्वीर आई कि चाइना ने इस वायरस को अपने देश में फैलने से रोक लिया है. इसी के साथ वहां कि इंटस्ट्रीज को चालू करके उन्होंने यह भी बता दिया कि हम अब अन्य पीड़ित देशों की मदद करने के लिए काम करेंगे. चाइना के राष्ट्रपति ने अपने भाषणों में अन्य देशों की मदद करने का कई बार जिक्र भी किया. ऐसे में देखने से तो ऐसा ही लगता है कि इस वायरस से बचाव में चीन का प्रोपेगेंडा छुपा हुआ था.

दोस्तों, अब आप सोच रहे होंगे कि चीन और अमेरिका में आंकड़ों को लेकर टकराव क्यों हैं? तो आपको बता दे कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में आंकड़े कुछ और है लेकिन उन्हें पेश नहीं किया जा रहा. चीन बार-बार इस चीज को लेकर सफाई देता भी नजर आया है. अमेरिका के आरोपों के बाद चीन ने अपने जांच के तरीके में भी फेरबदल किया. जिससे उसके आंकड़ों में इजाफा हुआ. दोस्तों, बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने अपने सरकारी मीडिया संस्थानों के अलावा किसी भी अन्य संस्था से आंकड़े जारी करने पाबंदी लगाई है. चीन यहीं नहीं रूका. उसने कोरोना के चलते अमेरिका के कई बड़े अखबारों और मीडिया संस्थानों को देश से बाहर का रास्ता भी दिखाया है.

दोस्तों, चीन के मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट और सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट पर शक करने की चार प्रमुख वजह हैं. पहली यह कि वायरस के बाद चीन में बड़ी संख्या में अस्थी कलश देखे गए हैं. लेकिन चीनी मीडिया इस पर कुछ जानकारी नहीं दे रहा है. दूसरी यह कि चीन की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी चाइना मोबाइल ने वायरस के बाद से 72 फीसदी ग्राहकों में कमी दर्ज की है. लेकिन यह नंबर किसी अन्य नेटवर्क पर भी शिफ्ट नहीं हुए हैं. ऐसे में यह ग्राहक आखिर कहां गए? तीसरा यह कि चीन के लेंडलाइन यूजर्स में भी लाखों की संख्या की गिरावट दर्ज हुई है. वहीं चौथा यह कि सबसे पहले चीन में यह वायरस फैला लेकिन अमेरिका, इटली और स्पेन के मुकाबले यहां पर आंकड़े कम कैसे हैं? दोस्तों, इन सभी बातों का चीन सिर्फ सख्ती बरतने का ही जवाब देता है.

यह पहली बार नहीं जब चीन की मीडिया रिपोर्ट और सरकारी आंकड़े झूठे निकले हो. साल 2003-04 में फैले SARS वायरस को भी चीन ने डब्लयूएचओ से एक महीने तक छुपाया था. चीन के झूठे आंकड़ों और देरी से दी गई जानकारी के कारण यह वायरस 29 देशों में फैल गया था. इसके कारण 774 लोगों की मौत भी हो गई थी. दोस्तों, चीन की झूठ की कहानी बहुत पुरानी है. इसीके साथ आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस डॉक्टर ने चीन में नए वायरस होने के पहले केस की पुष्टि की थी. उसे सरकार ने जेल में डाल दिया था. इसकी खबर विदेशी मीडिया संस्थाओं ने दुनिया को दी. चीन की मीडिया रिपोर्ट्स में तो इसका जिक्र भी नहीं था.

दोस्तों, चीन के मीडिया संस्थानों ने पहले भी इस तरह की झूठी रिपोर्ट्स जारी की है. दोस्तों, 2016 में जब चाइना के प्रोडक्ट का भारत में बहिष्कार किया जा रहा था. तब भी चीनी मीडिया ने अजीबो गरीब खबरें दिखाई. चीन के प्रमुख एवं सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक आर्टिकल में भारत के खिलाफ बहुत सी बातें लिखी गई. भारत के सामान को चीन के सामानों से कंपेर करते हुए लिखा गया कि ‘चीन के सामान के सामने भारत का सामान टीक नहीं पाएगा, भारत में बनना वाला सामान घटिया है और लोगों को यह ज्यादा पसंद नहीं आएगा.’ इसी के साथ भारत के मजदूरों को लेकर लिखा गया कि भारत के मजदूर पैसा कमाना चाहते हैं, लेकिन काम करना उन्हें पसंद नहीं है. दोस्तों, इसी के साथ ग्लोबल टाइम्स ने चीन की कंपनियों को सलाह दी कि भारत में निवेश न करें. अपने यहां ही सामान बनाए भारत में पैसे लगाने का कोई फायदा नहीं है. दोस्तों, अब चाइना कि इन सब बातों में कितनी सच्चाई है यह तो आप बखूबी जानते हैं. ऐसे में चीन की मीडिया रिपोर्ट्स भरोसा करने लायक नहीं है.

दोस्तों, चाइना ने हमेशा से ही अपनी मीडिया की मदद से खुद को प्रबल दिखाने और हर चीज में सक्षम होने की बात बताई है. चाहे बात कोरोना को रोकने की हो या भारत सहित अन्य देशों के चाइना से सामान खरीदने की. चीन ने हमेशा ही दुनिया को यह फर्जी एहसास दिलाया है कि चीन के सामानों के बिना हम अपना जीवन नहीं काट सकते हैं. दोस्तों, चीनी मीडिया वहां की सरकार के वश में है और सरकार के खिलाफ लिखना इतना आसान नहीं है. ऐसे में सरकार की अनुमति के बिना कोई भी खबर वहां नहीं दिखाई जा सकती है. ऐसे में कोरोना को लेकर जल्दी खुलासा कैसे हो सकता था?

सरकार द्वारा रिपोर्ट जारी करने के बाद चीनी मीडिया ने एक महीने के बाद दुनिया को कोरोना नाम के वायरस की जानकारी दी. इसी के साथ कुछ दिनों तक यह भी छुपाया कि यह वायरस इंसानों से इंसानों में फैल सकता है. ऐसे में चीनी मीडिया द्वारा जारी लोगों के संक्रमित और मरने के आंकड़ों पर सवाल उठना लाजमी हैं. यह पहली बार नहीं, जब चाइना से किसी वायरस ने जन्म लिया था. बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लूजैसे घातक वायरस भी चाइना में ही जन्में थे. इसी के साथ इन वायरस के प्रकोप के दौरान भी चाइना ने कई झूठी रिपोर्ट जारी की थी और दुनिया को गुमराह करने की कोशिश की थी. चाइनिज मीडिया ने कई बार अपने देश के वेट मार्केट के बंद होने की बात दिखाई है. लेकिन अभी तक भी इन मार्केट पर प्रतिबंध नहीं लग सका है और अब इस बात को पूरी दुनिया जानती है. दोस्तों, कमेंट कर जरूर बताएं कि क्या आप चीन के इन आंकड़ों पर भरोसा करते हैं? साथ ही कमेंट में जरूर बताएं कि चीन के कारण आज भारत को क्या-क्या समस्याओं का सामना करना पड़ कहा है.

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