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चांद पर एलियन का पता लगाएगा भारत का चंद्रयान-2?

बहुत दिनों से धरती से रेडियो तरंगें भेजी जा रही हैं ताकि अंतरिक्ष में कोई इंसानों जैसी बस्ती हो तो वो उन्हें सुनकर उनका जवाब दे. मगर अब तक एलियन ने इंसान के किसी भी संदेश का जवाब नहीं दिया है.

 इंसान हमेशा से इस खोज में लगा हुआ है कि क्या धरती के अलावा भी कहीं जीवन है? धरती के बार इंसान जीवन की खोज करने के लिए अपने कई मिशन भी भेज चुका है. ऐसा ही एक मिशन भारत ने भी लॉन्च किया है. इस मिशन का नाम चंद्रयान-2 है. दुनिया भर के लोग भारत के इस मिशन से हैरान है क्योंकि भारत के इस मिशन का मकसद चांद पर जीवन की खोज करना भी है. वहीं दोस्तों इंसान बरसों से एलियन की तलाश कर रहा है. कभी उसकी तलाश के लिए दूरबीन की मदद ली जाती है, तो कभी अंतरिक्ष में दूरबीन और यान भेजकर उसे तलाशा जाता है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के मिशन चंद्रयान-2 से भारत चांद पर एलियन की खोज तो नहीं करने वाला? सवाल ये भी उठता है कि क्या चांद पर एलियन रहता है? इन सवालों के जवाबों को आज हम तलाश करने की कोशिश करेंगे लेकिन दोस्तों उससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो नए अपडेट्स पाने के लिए जल्द से जल्द सब्सक्राइब कर लें. तो आइए शुरू करते हैं.

दोस्तों, बहुत दिनों से धरती से रेडियो तरंगें भेजी जा रही हैं ताकि अंतरिक्ष में कोई इंसानों जैसी बस्ती हो तो वो उन्हें सुनकर उनका जवाब दे. मगर अब तक एलियन ने इंसान के किसी भी संदेश का जवाब नहीं दिया है. करीब सौ सालों से धरती से अंतरिक्ष में संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं. लेकिन अभी तक किसी का भी जवाब नहीं मिला है.

दोस्तों, दुनिया की पहली सबसे बड़ी घटना जिसका बड़े पैमाने पर टीवी पर प्रसारण हुआ था, वो 1936 में बर्लिन में हुए ओलंपिक खेल थे. इस दौरान पैदा हुई रेडियो तरंगें अब तक करोड़ों किलोमीटर का सफर तय कर चुकी होंगी. मशहूर सीरियल 'गेम ऑफ थ्रोन' की रेडियो तरंगें अब तक हमारे सबसे करीबी सौर मंडल से भी आगे पहुंच चुकी होंगी. मगर, एलियन का जवाब अब तक नहीं आया. आखिर क्यों?

इसकी कई वजहें हो सकती हैं. हो सकता है कि जैसा हम सोच रहे हों, वैसे एलियन ब्रह्मांड में हों ही नहीं. या इतनी दूर हों कि उन तक अभी धरती से निकले रेडियो संदेश पहुंचे ही न हों. या फिर ब्रह्मांड के किसी और कोने में जो जीवन हो, वो अभी कीटाणु के दर्जे से आगे न बढ़ा हो.

अंतरिक्ष में एलियन की तलाश में जुटी संस्था एसईटीआई यानी सेटी यानी 'सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस' से जुड़े सेथ शोस्टाक कहते हैं कि हमने एलियन की बहुत सारी फिल्में देखी हैं. इसलिए उनकी एक खास तस्वीर हमारे जहन में बन गई है. मगर हो सकता है कि अगर उनका संदेश आए भी तो वो वैसे न हों, जैसा हमने सोच रखा हो. सेटी पिछले पचास सालों से अंतरिक्ष में एलियन को ढूंढ रही है लेकिन अब तक उसे कोई कामयाबी नहीं मिली है.

एलियन तलाशने वाली संस्था 'सेटी' कुछ रेडियो दूरबीनों की मदद से अंतरिक्ष में एलियन के संदेश सुनने की कोशिश करती है. खास तौर से उन जगहों पर जहां अंतरिक्ष यानों ने नए ग्रह की संभावना जताई है. इन ग्रहों पर पानी और हवा होने की उम्मीद है. इनमें चांद भी एक है. चांद पर पानी की पुष्टि पहले ही की जा चुकी है. ऐसे में कुछ लोगों का कहना ये भी है एलियन चांद पर रहते हैं. चांद पर ही एलियन की मौजूदगी है क्योंकि चांद पर पानी की पुष्टि भी की जा चुकी है. ऐसे में एलियन की वहां मौजूदगी को थौड़ा और ज्यादा बल मिलता है. साथ ही आज तक इंसान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर नहीं पहुंच पाया है. जिसके कारण लोगों के मन में ये सवाल भी उठता है कि कहीं एलियन चांद के साउथ पोल में तो नहीं रहते हैं? अगर एलियन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर रहते हैं तो इसका पता भी जल्द ही चल जाएगा क्योंकि भारत ने अपना मिशन चंद्रयान-2 चांद पर भेजा है.

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भारत के दूसरे चंद्रमा अभियान चंद्रयान-2 को बाहुबली रॉकेट जीएसएलवी-मार्क-3 के साथ सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया. 375 करोड़ रुपये के जियोसिंक्रोनाइज सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-3 रॉकेट ने 3.8 टन वजनी और 603 करोड़ रुपये की कीमत के चंद्रयान-2 को लेकर अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी. चंद्रयान-2 पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की लगभग 384,400 किमी की यात्रा तय करेगा. यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का अध्ययन करेगा जोकि अभी तक दुनिया के किसी भी अंतरिक्ष मिशन में नहीं किया गया है. अगर चंद्रयान-2 की मदद से भारत पता लगा लेता है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव में एलियन रहते हैं या नहीं तो ये भारत के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है.

हालांकि दोस्तों, एलियन ब्रह्मांड में कहीं भी हो सकते हैं. जरूरी नहीं कि सिर्फ चांद पर ही एलियन हो क्योंकि इन्हें ऊर्जा की बड़े पैमाने पर जरूरत होती है. ऐसे में अगर चंद्रयान-2 इस बात का पता लगाता है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव में एलियन नहीं है तो अंतरिक्ष के उन कोनों में झांकने की भी जरूरत पड़ेगी जहां पर ऊर्जा के बड़े स्रोत होने की संभावना हो.

हालांकि हर ऊर्जा वाली जगह पर स्पेस मिशन भेजना आसान काम नहीं होता है. ऐसे में दुनिया को जरूरी है कि वो एलियन का पता लगाने के लिए और तकनीकी का विकास करें. वहीं सेटी रेडियो दूरबीनों की मदद से ही एलियन की तलाश जारी रख रहा है. लेकिन आगे चलकर सेटी को भी दूसरा विकल्प अपनाना चाहिए ताकि एलियन होने की पुष्टि के बारे में कुछ हिंट भी मिल सके.

वहीं एलियन को खोजने का एक दूसरा तरीका ये भी है कि धरती से किसी खास ग्रह या ब्रह्मांड के किसी खास कोने की तरफ रेडियो संदेश भेजे जाएं. ताकि वहां से किसी तरह का जवाब वापस आ सके. हालांकि स्टीफन हॉकिंग जैसे वैज्ञानिक इसका विरोध कर चुके हैं. उन्हें डर था कि इससे धरती के लिए खतरा बढ़ जाएगा क्योंकि ये भी हो सकता है कि हमसे ताकतवर जीव ब्रह्मांड में कहीं हों और उन्हें हमारे बारे में अब तक पता न हो. मगर रेडियो संदेश मिलते ही वो हमें तलाशते हुए आ जाएं. ऐसे में मानवता का भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

हालांकि एलियन है या नहीं इस बात से न तो कोई इनकार करता है और न ही पक्के तौर पर इसके बारे में कहता है. लेकिन इन सबके बावजूद एलियन की तलाश जारी है.