Home Facts बारिश के मौसम में बिहार की खस्ता हालत, हर साल टूटती है सड़कें

बारिश के मौसम में बिहार की खस्ता हालत, हर साल टूटती है सड़कें

by Gwriter

बिहार राज्य कई चीजों में अभी खुद को सुधार नहीं पाया है. शिक्षा की बात हो या सड़कों की दोनों को ही बेहतर करने में बिहार लगा हुआ है. हालांकि बारिश के दिनों में बिहार की हालत सबसे ज्यादा खराब हो जाती है. सड़कें, अस्पताल और स्कूल सब जगह पानी ही पानी नजर आने लगता है. बिहार के विकास पर हर साल लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं लेकिन बारिश के मौसम में लगभग सभी विकास कार्यों पर बाढ़ का पानी फिर जाता है. जून 2020 में बिहार के मुखिया नीतिश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गंडक नदी पर बनाए गए एक पुल का उद्घाटन किया था. लगभग 264 करोड़ रुपए की लागत से बना 1.4 किलोमीटर लंबा सत्तरघाट महासेतु पुल महज 29 दिन ही टिक पाया. 8 सालों की मेहनत के बाद बना यह पुल बारिश में गंडक नदी के अधिक दवाब नहीं झेल पाया और इसका एक हिस्सा धराशाही हो गया.

बिहार में ऐसे कई विकास कार्यों के उदाहरण हैं. जिनको मौसमी बारिश और नेपाल के जरिए छोड़े जाने वाला पाना अपने साथ बहा कर ले गया. दरअसल, बिहार में सड़कों की इतनी खराब हालत के कई पहलू है. जिसमें बिहार की सफाई व्यवस्था एक अहम रोल अदा करती है. राज्य में बीते सालों कई इलाकों में सफाई नहीं की गई है. नालियों में गंदगी, पॉलीथिन आदि चीजें अटकी रहती हैं. जिससे नाले जाम रहते हैं. बिहार में बीते कई सालों से बारिश अपने पुराने रिकार्ड तोड़ रही है. जिसका सीधा असर बिहार की सड़कों पर पड़ता है. नालियां जाम रहने से बिहार के हर गली और मोहल्लों में लबालब पानी भर जाता है. हफ्तों तक पानी की निकासी न होने से सड़क की गिट्टियां उखड़ जाती हैं. जिससे बारिश खत्म होने तक सड़क फिर से खराब हो जाती है.

इसी के साथ प्रदेश में सड़कों के हाल ठीक न रहने का एक अहम रोल मरम्मती कार्य न होने का भी है. बिहार में 127 किलोमीटर लंबी सड़क का 2014 में टेंडर हुआ था. इस पूरे निर्माण कार्य पर 27 सौ करोड़ रुपए खर्च होने थे. लेकिन जिस कंपनी को सड़क का टेंडर दिया गया उसके दिवालिया होने की वजह से काम आधा-अधूरा ही रहा गया. हैदराबाद की सड़क निर्माण कंपनी आईएलएफएसएल ने दो सालों में महज नौ फीसदी ही काम पूरा किया. नतीजन बारिश के समय बिहार की हालत और ज्यादा खराब हो गई. नालियों की सफाई के साथ सड़कों को खराब करने में नेपाल की भी हिस्सेदारी रही है. हर साल नेपाल द्वारा गंडक और कोशी नदी में पानी छोड़ा जाता है. इन दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से बिहार में बाढ़ के हालात बन जाते हैं या यह कह लीजिए कि बिहार में बाढ़ आ जाती है. जिसका सीधा असर सड़कों पर भी पड़ता है.

अब सवाल यह है कि परेशानी तो बहुत है लेकिन इनका सोल्यूशन क्या है? बिहार में सड़कों को ठीक रखने के लिए तीन सोल्यूशन अपनाए जा सकते हैं. पहला यह कि सरकार को प्रदेश की हर गली व मोहल्लों की नाली की सफाई करवानी पड़ेगी. हर साल बारिश के मौसम से पहले सफाई व्यवस्था चाक चौबंद करनी पड़ेगी. इस के साथ साल के अन्य दिनों में तेजी से उच्च गुणवत्ता वाली सड़क का निर्माण करवाना पड़ेगा. जिससे वह एक बारिश के सीजन में ही ध्वस्त न हो जाए. इसी के साथ बाढ़ से निपटने के पुख्ता इंतजाम करने होंगे. पानी निकासी की सही व्यवस्था करने से बाढ़ के पानी की निकासी भी आसानी से की जा सकती है. इन सभी कार्यों से बाढ़ और जलभराव की समस्या से लोगों को राहत मिलेगी. साथ ही बिहार की सड़कों भी दुरुस्त रह पाएंगी.

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