Home Trending मोदी के आगे झुका तालिबान, चीन देखता रह गया

मोदी के आगे झुका तालिबान, चीन देखता रह गया

by GwriterBSP

इस वक़्त तालिबान ने अपना आतंक पुरे अफ़ग़ानिस्तान में मचा रखा है, अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान से निकालने के बाद अफ़ग़ानिस्तान के लोग तालिबान का सबसे खूंखार रूप देख रहे है। तालिबान सरेआम बीच सड़कों पर अफ़ग़ानिस्तान लोगो को फांसी दे रहा है। लेकिन तालिबान के इस कहर को भारत ने खत्म कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की दहाड़ सुन आतंकिस्तान उर्फ पाकिस्तान और चीन भी भौंचके रह गए और तालिबान को भारत से बचा ना सके।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने तालिबान के खिलाफ प्रस्ताव लाकर चीन और पाकिस्तान दोनों पर दोहरा वार करते हुए और अपनी बात मनवाने के लिए, भारत ने तालिबान को संयुक्त राष्ट्र में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। तालिबान के चहिते चीन पाकिस्तान भारत को बस देखते ही रहे गए और भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपना खेल, खेल दिया।
दरअसल अगस्त माह की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता इस समय भारत के पास है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जो देश अध्यक्ष होताा है वही यूएनएससी में प्रस्ताव और चर्चा के मुद्दे क्या होंगे यह सुनिश्चित करता है भारत ने अपनी इसी कूटनीतिक शक्ति का प्रयोग करते हुए तालिबान पर शिकंजा कस्ते हुए, संयुक्त राष्ट्र संघ में तालिबान के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आया जिसका संयुक्त राष्ट्र संघ के 5 स्थाई सदस्य और 10 अस्थाई सदस्यों ने पूरी तरह समर्थन किया। तालिबान के खिलाफ पारित हुआ यह प्रस्ताव तालिबान के पैर की बेड़ियां बन चुका है जिसको चाहकर भी तालिबान तोड़ नहीं सकता। प्रस्ताव में तालिबान को कहा गया है कि तालिबान को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में अफ़ग़ानिस्तान की जमीन का प्रयोग किसी दूसरे देश में आतंकी घटनाओं, आतंकियों को ट्रेनिंग देने या फिर देहशत गरदो को फाइनेंसिंग करने में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं प्रस्ताव में खास तौर पर भारत के कट्टर दुश्मन कहे जाने वाले आतंकी संगठनों जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा का भी नाम लिया गया है।

इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान से भारत आने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी बात कही गई है। इस प्रस्ताव के कारण तालिबान में फंसे अल्पसंखयक समुदाय के लोग जो भारत आना चाहते है वह भी आ सकते है। भारत ने इस प्रस्ताव में यह कहा है कि तालिबान की यह जिम्मेदारी है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में फंसे विदेशी लोगों को उनके अपने देश में जाने तक विभिन्न देशों को सहयोग करे।
तालिबान पर भारत द्वारा लाया गया यह प्रस्ताव तालिबान के लिए गले की फांस बन गया है क्योंकि चाह कर भी तालिबान यदि प्रस्ताव में कही गई बातों को नहीं मानता तो ना तो तालिबान को रूस बचा सकता है और न हीं चाइना।
और बात रही पाकिस्तानी की तो पाकिस्तान की हालत खुद इस समय बहुत खराब है । पाकिस्तान इस समय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स की ग्रे लिस्ट में है उसकी खुद की हालत इतनी बुरी है कि वह चाइना से कर्जा लेकर अपने देश को चला रहा है।
भारत की संयुक्त राष्ट्र में दहाड़ देख तालिबान ने डर के मारे कतर के दोहा में भारत के दूतवास के समक्ष बातचीत का प्रस्ताव रखा। क्योंकि तालिबान जानता है कि यदि भारत से हमने दुश्मनी मोल की तो भारत इतनी जगह से हमला करेगा कि तालिबान दुबारा उठ नहीं पाएगा। तालिबान जानता है कि भारत ने कैसे उसके बाप पाकिस्तान के घर में घुसकर वहां के पुरे आतंकवादी कैंप को नेस्तना बूद कर दिया था। इसलिए तालिबान के प्रमुख नेताओं ने भारत के समक्ष बातचीत का प्रस्ताव रखा। जिसको भारत ने मान लिया। भारत तालिबान बातचीत में भारत ने तालिबान को चेताते हुए अफ़ग़ानिस्तान में फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षा और अफ़ग़ानिस्तान की सर जमीन का भारत के खिलाफ कभी भी आतंकी घटनाओं के रूप में प्रयोग ना हो यह सुनिश्चित करते हुए अपनी बात रखी। भारत की ताकत लोहा मानते हुए तालिबान ने भारत की दोनों शर्ते मानी और भारत से राजनीतिक और व्यापारिक संबंध पहले कि तरह बने रहे उस पर भारत से आग्रह किया।

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