‘बेटी बचाओ’ – अभियान या चेतावनी…सोशल मीडिया के सड़कों पर उतरे सितारे

उन्नाव हो, कठुआ हो, कर्नाटक का गरदोली हो या पूर्वी प्रान्त आसाम, भारत की चारों दिशाओं में इन दिनों जो विषय सबसे अधिक तहलका मचाए हुए है वह है महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़. महिलाओं की अस्मिता पर अत्याचार के मामले जिस गति से सामने आ रहे हैं, उन्होंने एक सभ्य समाज के रूप में भारत को शर्मसार कर दिया है और सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम किस प्रगति की बात कर रहे हैं और हमारे समाज की गति की दिशा क्या है.

बेटी बचाओ

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने पहले संबोधन में ही इस विषय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट की थी. जनवरी 2015 में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के नाम से इस योजना की शुरुआत हुई. जिसका लक्ष्य बेटियों की घटती संख्या के अनुपात को सुधारना था. हालाँकि इसके साथ ही बेटियों की शिक्षा को भी इस अभियान में शामिल किया गया.

‘बलात्कार’ की सजा है ‘मौत’

पर ना बच सकी बेटियाँ

निर्भया गैंगरेप कांड आजाद भारत के इतिहास की उन चुनिन्दा घटनाओं में एक था, जिन्होंने पूरे देश को एक कर दिया. इस घटना के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन हुए थे. दिल्ली में सर्वाधिक प्रदर्शन हुए जिसको संभाल पाने की विफलता तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार को गिराने के कारणों में एक बनी.

इस घटना के बाद रेप सम्बंधित कानून में परिवर्तन हुआ और इसमें दोषी के लिए मृत्यु की सजा भी तय की गई. किन्तु देश में रेप की होने वाली घटनाओं में कोई विशेष कमी दर्ज नहीं हुई जिसका प्रमुख कारण रहा दोषियों को सजा ना मिलना. ये तथ्य इस बात को समझाने हेतु पर्याप्त है कि कड़े-से-कड़े कानून का भी यदि प्रयोग ना हो, तो वह खाल में भूसा भरे शेर की भांति सजावट की ही वस्तु बनकर रह जाता है,

दुष्कर्मों की जारी श्रृंखला

हाल-फ़िलहाल में घटी इन घटनाओं के बढ़ते हुए घिनौने और दर्दनाक स्वरुप ने फिर से पूरे देश को झकझोरकर रख दिया. दुःख की बात यह है कि इन घटनाओं का शिकार 8 माह से लेकर 8 वर्ष तक की बच्चियाँ और 60 वर्ष तक की वृद्धाएँ भी हुई. इन घटनाओं को अंजाम देने में नाबालिगों से लेकर 70 साल की आयु तक के व्यक्ति दोषी पाए गए.

सरकार की नई चाल

विरोध के स्वर

इनके विरोध में पिछली बार ही की तरह पूरा देश फिर एकजुट होकर खड़ा हुआ. सभी ओर से निंदा के स्वर सुनाई पड़े और इसमें सेलेब्रिटीज ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. पोर्नस्टार से फ़िल्मी अभिनेत्री बनी सनी लियोनी ने इन्स्टाग्राम पर अपनी बच्ची को लिए हुए एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह अपनी बच्ची को सभी प्रकार की दुष्ट शक्तियों से बचाने का आश्वासन दे रही हैं.

वहीँ अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने हाथ में प्लेकार्ड लेकर ‘देवी’ मंदिर में इस घटना के घटने पर रोष जताते हुए अपनी तस्वीर डाली.

अभिनेत्री और मॉडल देबलीना सेन ने कहा कि ‘बेटी बचाओ यह एक चेतावनी थी’

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कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज ने ट्विटर पर भी अपना दुःख प्रकट किया. कुल मिलाकर इन घटनाओं को लेकर पूरा देश रोष में है और प्रदर्शनों का यह क्रम यहीं रुकने वाला नहीं है.

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