Home Facts कोरोना वायरस के कारण भारत बनेगा महाशक्ति?

कोरोना वायरस के कारण भारत बनेगा महाशक्ति?

by Gwriter
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है. दुनिया के लगभग सारे देश कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं. चीन के वुहान से फैलना शुरू हुए कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में महामारी तो फैलाई ही है, साथ ही आर्थिक तबाही भी मचाई है. कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन लागू है. इस लॉकडाउन के कारण दुनियाभर के कई देशों में आर्थिक गतिविधियां ठप्प पड़ चुकी है. जिसका सीधा असर इकॉनोमी पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. आने वाले वक्त में ग्लोबल इकॉनमी में काफी गिरावट भी दर्ज की जाने वाली है. इस आर्थिक तबाही के कारण कई देश चीन के खिलाफ आ चुके हैं. वहीं विश्व में अब भारत एक नए बाजार के रूप में उभरता हुआ नजर आ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि कोरोना वायरस के कारण क्या दुनिया चीन के साथ कारोबार करना बंद कर देंगी? क्या कोरोना वायरस के कारण भारत एक बड़े बाजार के रूप में दुनिया के सामने उभर कर आ सकता है? क्या कोरोना वायरस के कारण भारत महाशक्ति बन सकता है? आइए आज इन्हीं सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

दोस्तों, चीन से फैले कोरोना वायरस का असर यह है कि इससे दुनिया में लाखों लोगों की जान जा चुकी है. वहीं आर्थिक मौर्चे पर यह हर सेक्टर में नुकसान ला रहा है. कोरोना वायरस के दहशत का आलम यह है कि फैक्ट्रियां और कंपनियां बंद पड़ी हैं, हर तरह के ट्रांसपोर्ट ठप्प हैं, लोगों और श्रमिक में खौफ बैठा हुआ है. कोरोबारी गतिविधियों पर ब्रेक लगने के कारण उत्पादन और आपूर्ति की पूरी कड़ी ही उलझ गई है. दुनियाभर के उद्योगों में अफरातफरी मची हुई है. कोरोना वायरस के कारण दुनिया के हर कारोबारी सेक्टर पर असर पड़ा है. मैन्युफैक्चरिंग घट गई है. तेल की मांग में गिरावट देखी गई है. समुद्री व्यापार रुक गया है. एयर ट्रांसपोर्टेशन का नामोनिशान ही मिट जा गया है. साथ ही दुनियाभर के शेयर बाजारों का हाल ये है कि निवेशक सिर्फ और सिर्फ बिकवाली ही कर रहे हैं.

दोस्तों, अगर मैन्युफैक्चरिंग निर्यात कि बात करें तो संयुक्त राष्ट्र के इकॉनमिस्ट के अनुमान के मुताबिक कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर में मैन्युफैक्चरिंग निर्यात में 50 अरब डॉलर गिरावट आने को अनुमान है. कोरोना वायरस के कारण तेल की मांग में कमी आई है. जिसके कारण कच्चे तेल के दाम कोड़ियों के भाव में आ चुके हैं. हालांकि हालात ये है कि तेल के दाम कोड़ियों के भाव पर आने के बाद भी इनके लिए बाजार में खरीदार नहीं है. एविऐशन सेक्टर को तेल की मांग काफी ज्यादा रहती थी. किसी भी फ्लाइट को उड़ाने के लिए काफी ज्यादा मात्रा में फ्यूल लगता है. हालांकि दुनियाभर में एयरलाइंस कंपनियों का कारोबार ठप्प पड़ा हुआ है. इस कारण भी तेल की मांग में कमी दर्ज की गई है. वहीं कोरोना वायरस दुनिया के शेयर बाजारों में भी कहर लेकर आया है. दुनियाभर के शेयर बाजारों में साल 2008 की मंदी के बाद की सबसे तेज गिरावट देखने को मिली है. स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों को लोन चुकाने में मुश्किल होगी. इस कारण 1.1 ट्रिलियन डॉलर के लोन एनपीए हो सकते हैं.

दोस्तों दुनिया में आई इस आर्थिक तबाही के लिए दुनिया चीन को जिम्मेदार ठहरा रही है क्योंकि ये तबाही कोरोना वायरस के कारण मची है और कोरोना वायरस चीन से ही आया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो कई बार चीन को सीधे तौर पर भी इस हालात के लिए जिम्मेदार मान चुके हैं. वहीं अब अमेरिका और जापान ऐसे देश हैं जो चीन को सबक सीखाने के लिए आगे आ चुके हैं. दोनों ही देशों ने चीन के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ दिया है. जापान ऐसा पहला देश है जो चीन से अपना कारोबार समेटने की तैयारी में है. जापान ने चीन से कारोबार समेटने वाली अपनी कंपनियों के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया है. वहीं कोरोना वायरस के खिलाफ बड़ी लड़ाई में उलझे अमेरिका के बड़े राजनेता और कांग्रेस सदस्य धमकी दे रहे हैं कि अब चीन पर अपनी निर्भरता कम करनी ही होगी. ऐसे में भारत के लिए चीन के विकल्प के तौर पर स्थापित होने का एक सुनहरा अवसर आता दिख रहा है.

दोस्तों, भारत में आम बजट 2020-21 में वित्त मंत्री ने पहले ही यह मंशा जता दी थी कि भारत चीन पर तमाम रोजमर्रा के उत्पादों के लिए अपनी निर्भरता खत्म करेगा. इस बारे में दुनिया में चल रही कवायदों को देख भारत सरकार आगे भी नीतियों में बड़े बदलाव की तैयारी में है. चीन के साथ व्यापारिक दूरी बनाने वाले देशों को भारत अपने यहां निवेश के लिए आमंत्रित करने और उनके लिए अनुकूल वातावरण बनाना प्राथमिकता होगी. जापान के जरिए चीन से कारोबार समेटने का ऐलान करने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो आबे के बीच टेलीफोन पर बातचीत भी हुई. इस बातचीत का अपना महत्व है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनो नेताओं के बीच कोविड-19 के खिलाफ साझा सहयोग के अलावा इस महामारी के बाद के माहौल में साझा आर्थिक सहयोग के मुद्दों पर भी चर्चा हुई. दोनो देशों में पहले ही जापान को एक लाख प्रशिक्षित श्रमिक देने को लेकर समझौता हुआ है. वहीं चीन में काम करने वाली जापानी कंपनियों को वहां से अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर जापान में उत्पादन शुरू करने के लिए आबे सरकार ने 2 अरब डॉलर का फंड दिया है. जापान ने चीन से बाहर किसी अन्य देश में जाकर उत्पादन करने पर उन जापानी कंपनियों को 21.5 करोड़ डॉलर की मदद का प्रस्ताव रखा है. यूएस इंडिया स्ट्रैटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम यानी यूएसआईएसपीएफ के मुताबिक अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वार के चरम पर चीन में उत्पादन करने वाली 200 अमेरिकी कंपनियां पिछले साल ही भारत में निवेश की इच्छा जता चुकी है. अब कोरोना वायरस की उत्पत्ति के लिए चीन के जिम्मेदार होने से ये कंपनियां भारत में निवेश के लिए और भी जल्दीबाजी दिखा सकती है.

दोस्तों, कोरोना वायरस के कारण लाखों लोगों की मौत और आर्थिक तौर पर नुकसान के कारण दुनिया में चीन के खिलाफ माहौल बना है. यह वक्त निश्चित रूप से भारत के लिए निवेश लाने का बड़ा अवसर है क्योंकि दुनिया में चीन के खिलाफ हवा बह रही है. इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल जैसी जापानी और अमेरिकी कंपनियों को लाने में सफलता इसलिए भी मिल सकती है क्योंकि हाल में ही सरकार ने इन क्षेत्रों में निवेश के लिए तीस हजार करोड़ से अधिक के पैकेज का एलान किया है. लेकिन यह तभी संभव हो सकता जब केंद्र और राज्य दोनों ही सरकार एकजुट होकर काम करेंगी क्योंकि सिर्फ केंद्र की तरफ से तत्परता दिखाने से काम नहीं बनने वाला है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के खिलाफ कई बार ऐसे मौके आए हैं, जिसे भारत भुना सकता था. एक उदाहरण वियतनाम का है जिसने सही समय पर कदम उठाकर चीन से बाहर भाग रही इलेक्ट्रोनिक कंपनियों को अपने यहां बुला लिया. वियतनाम अभी 90 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात करता है जबकि भारत 8.5 अरब डॉलर के आस-पास ही अटका है. वहीं भारत भी अब चीन के खिलाफ बने माहौल को भुनाकर महाशक्ति बनने की तरफ कदम बढ़ा सकता है. सरकार निवेश को लेकर ऐसी नीति बना रही है जो केंद्र और राज्य दोनों जगह मान्य होगी. राज्य सरकारों की तरफ से केंद्र के फैसले में राजनीतिक या अन्य वजहों से रोड़े नहीं अटकाये जा सकेंगे. ऐसा करने पर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई होगी. एक तय समय में सिंगल विंडो से निवेश की मंजूरी मिलने पर उस आवेदन को मंजूर समझा जाएगा.

दोस्तों, आज जब विश्व भारत की ओर निहार रहा है, तब दुनिया चीन के साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी कठघरे में खड़ा कर रहा है, क्योंकि इस संगठन ने चीन के सुर में सुर मिलाकर दुनिया को समय रहते कोरोना वायरस से होने वाली तबाही के लिए चेताया नहीं. उसने चीन की गोद में बैठने का जो काम किया, उसके कारण ही उसकी फजीहत हो रही है. यह फजीहत होनी भी चाहिए, क्योंकि उसके कारण दुनिया बहुत गहरे संकट में फंस गई है. वहीं चीन न तो लोकतांत्रिक तौर-तरीके अपनाने को तैयार है और न ही अपने सामाजिक-राजनीतिक व्यवहार को बदलने के लिए तैयार है. इसलिए अमेरिका, जापान समेत अन्य अनेक विकसित देश अपने कारखाने चीन से बाहर लाने की तैयारी कर रहे हैं. यह सही भी है क्योंकि इसका कोई फायदा नहीं है कि इतनी बड़ी आर्थिक तबाही के बाद भी चीन दुनिया का कारखाना बना रहे. विकसित देशों की ओर से अपने कारखाने चीन से बाहर निकालने की तैयारी भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है. भारत सरकार को भी इस अवसर को भुनाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाने चाहिए. यदि विकसित देशों के चीन में स्थापित कारखाने भारत आ सकें तो इससे देश के आर्थिक भविष्य को कहीं अधिक आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है.

दोस्तों, कोरोना संकट से पूरी दुनिया अस्त-व्यस्त हो गई है, लेकिन जब यह संकट पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, तब एक नई अर्थव्यवस्था देखने को मिलेगी. यकीन मानिए, चीन अलग-थलग पड़ा तो भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकेगा. दुनियाभर के निवेशक भारत को सबसे सुरक्षित देश मानकर पूंजी निवेश करने का सोच रहे हैं. धन-संसाधन में कमजोर होते हुए भी जिस तरह से भारत ने कोरोना वायरस को नियंत्रित करने में कदम उठाए हैं, वो भारत की अच्छी छवि दुनिया के सामने बना रहा है. हालांकि इसमें कुछ वक्त लग सकता है लेकिन आने वाले वक्त में औद्योगिक माहौल तेजी से बदलने वाला है. हम दुनिया के देशों को कोरोना के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन दवा दे रहे हैं. इसे नई अर्थव्यवस्था की शुरुआत मानने में कोई हर्ज नहीं है. अमेरिका और जापान जैसे कई देश इस दवा के लिए भारत पर निर्भर हैं, यह छोटी बात नहीं है. कोरोना के बाद भारत के तमाम बंद पड़े उद्योग और कल-कारखाने फिर से रफ्तार पकड़ेंगे.

दोस्तों, भारत में चीन का सामान काफी ज्यादा मिलता है. भारत को महाशक्ति बनने के लिए चीन के सामानों को भी अपने देश में बिकने से रोकना होगा. हालांकि भारत के सामने सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि डब्ल्यूटीओ नियमों के कारण अब किसी देश से आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है चाहे उस देश के साथ हमारे राजनयिक, क्षेत्रीय या सैन्य समस्याएं क्यों न हो. भारतीय बाजार में जितनी बड़ी मात्रा में चाइनीज सामान मिलता है उससे तो सिर्फ यह लगता है कि चीन के उद्योगपतियों ने भारत में मनाए जाने वाले हर त्यौहार, उत्सव, समाज, आयु वर्ग, विभिन्न प्रदेशों में इस्तेमाल होने वालों समानों की लिस्ट बनाई होगी और फिर उत्पादन शुरू किया होगा. तभी तो हमारे शादी समारोह से लेकर जन्मदिन, होली, दिवाली, रक्षाबंधन सभी अवसरों के लिए ‘मेड इन चाइना’ सामान सस्ते दामों पर हर दुकान और नुक्कड़ पर मिलता है. ऐसे में भारत को सबसे पहले अपने आंतरिक बाजार को चाइनीज सामानों से भी मुक्त करना होगा. हालांकि महाशक्ति बनने के लिए भारत को भी कुछ कदम उठाने होंगे. भारत को महाशक्ति बनने के लिए अपनी नीतियों में जरूरी बदलाव करने होंगे, नयी नीतियां बनानी होंगी. निजी उद्यमों को हर लिहाज से प्रोत्साहित करते रहना होगा. खुदरा व्यापार, होटल उद्योग और उत्पादन सेक्टरों में रोजगार बहाली के लिए उपायों की एक पूरी व्यवस्था बनानी होगी. टास्क फोर्सेस के गठन की फौरन जरूरत होगी.

दोस्तों, यह देखना सुखद है कि इस कोरोना संकट के वक्त विश्व भारत की ओर उम्मीदों से देख रहा है. इसका कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पहले सार्क और फिर जी-20 सम्मेलन के जरिए इसके लिए सक्रियता दिखाना रहा कि कोरोना के कहर से मिलकर कैसे निपटा जाए. भारतीय प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के कारण उपजी कोविड-19 बीमारी के उपचार में सहायक मानी जाने वाली मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन जिस तरह से तमाम देशों को उपलब्ध कराई, उससे उनके साथ-साथ भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और ज्यादा निखरी है. विश्व समुदाय भारत की सराहना करने के साथ ही इस पर भी निगाह लगाए है कि वह कोरोना संकट से कैसे पार पाता है. साफ है कि कोरोना के कहर को थामकर भारत एक मिसाल कायम करने के साथ ही दुनिया की उन उम्मीदों को पूरा कर सकता है जो विश्व समुदाय उससे लगाए हुए है. ऐसे में कोरोना वायरस के कारण भारत के सामने दुनिया में महाशक्ति बनने का एक सुनहरा मौका सामने आया है. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि क्या भारत में महाशक्ति बनने की क्षमता है या नहीं.

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