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जल्द निपटा लें जरूरी काम, 5 दिन बंद रहने वाले हैं बैंक, ग्राहकों को हो सकता है घाटा

जल्द निपटा लें जरूरी काम, 5 दिन बंद रहने वाले हैं बैंक, ग्राहकों को हो सकता है घाटा
अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई काम है तो जल्द ही निपटा लें वरना फिर क्रिसमम की छुट्टियों तक के लिए इंतजार करना होगा. क्योंकि अब पांच दिनों तक बैंक बंद रह सकते हैं. जिसके कारण आपको कैश की किल्लत से जूझना पड़ सकता है. बैंक कर्मचारियों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 26 दिसंबर को हड़ताल का ऐलान किया था, लेकिन अब कई बैंक यूनियनों ने 21 को भी कामकाज ठप करने का ऐलान कर दिया है. ऐसे में हड़ताल के कारण भी आम लोगों को बैंकिंग प्रणाली से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. बैंक कर्मचारी 11वें वेतनमान को लागू न किए जाने के विरोध में हड़ताल कर रहे हैं. ऐसे में 21 दिसंबर को बैंक की हड़ताल रहेगी. इसके बाद 22 दिसंबर को महीने का चौथा शनिवार होने के कारण शनिवार को भी बैंक बंद रहने वाले हैं. फिर 23 दिसंबर को रविवार है और रविवार को वैसे भी बैंक का अवकाश रहता है. 24 दिसबंर यानी सोमवार को बैंक खुलेंगे. इस दिन किसी भी तरह की छुट्टी नहीं है लेकिन इसके बाद 25 दिसंबर को बैंक की क्रिसमस डे की छुट्टी रहेगी. फिर 26 दिसंबर को बैंक यूनियन ने हड़ताल का ऐलान किया है. इस तरह बैंक 5 दिन बंद रहेंगे. ऐसे में आपको यदि बैंकिंग से जुड़ा काम है को फिर जल्द ही निपटा लें या 27 दिसंबर तक का इंतजार करें. ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन के असिस्टेंट जनरल सेक्रटरी संजय दास ने कहा कि हमने 11वें वेतनमान को बिना शर्त लागू किए जाने की मांग के साथ 21 तारीख हड़ताल का ऐलान किया है. मई 2017 के डिमांड चार्टर के अनुसार हमारी मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए.' दास के मुताबिक हड़ताल में 3.2 लाख बैंक कर्मचारी हिस्सा लेंगे. सूत्रों के मुताबिक 21 दिसंबर की हड़ताल के दौरान एटीएम का ऑपरेशन सुचारू रह सकता है, लेकिन 26 तारीख की हड़ताल के दौरान इनके संचालन पर भी असर पड़ने की संभावना है. भगवान हनुमान पर फिर मचा बवाल, अब बजरंगबली को मुसलमान कह दिया… दूसरी तरफ वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में फंसे कर्ज (एनपीए) की पहचान लगभग पूरी हो चुकी है. साथ ही जेटली ने कहा है कि सरकार के जरिए चालू वित्त वर्ष के बाकी महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 83000 करोड़ रुपए डाले जाएंगे. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार चालू वित्त वर्ष के बचे हुए महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 83000 करोड़ रुपए की पूंजी डालेगी. इससे पहले दिन में सरकार ने अनुपूरक अनुदान मांग की दूसरी किस्त के जरिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 41000 करोड़ रुपए की पूंजी डालने के लिए संसद की मंजूरी मांगी. इससे चालू वित्त वर्ष में बैंकों में 65000 करोड़ रुपए के बजाए कुल 1.06 लाख करोड़ रुपए की पूंजी डाली जाएगी. जेटली ने कहा कि पूंजी डाले जाने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी और आरबीआई के तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) रूपरेखा से बाहर निकलने में मदद मिलेगी. जेटली ने कहा कि एनपीए की पहचान लगभग पूरी हो चुकी है. गैर पहचान वाले अब 0.59 फीसदी हैं जो कि मार्च 2015 में 0.7 फीसदी थे. साथ ही इसमें सुधार होता हुआ पिछली तिमाही में देखा जा चुका है. एनपीए में गिरावट अब शुरू हो जाएगी. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि आपको कौनसा बैंक लेनदेन को लेकर सबसे ज्यादा पसंद आता है.