बीजेपी नेता ने ही खोल दी पार्टी की हार की पोल, बीजेपी की हार की ये बड़ी वजह जानकर देश में बवाल मच गया है…?

2018 विधानसभा चुनाव नतीजों के कई बड़े सिग्नल निकलकर सामने आ रहे हैं. सबसे पहली बात ये कि छत्तीसगढ़, राजस्थान के नतीजों ने साबित किया है कि बीजेपी की निगेटिव ब्रांडिंग के बावजूद राहुल गांधी चमके हैं. बीजेपी के नॉर्थ इंडिया जनाधार में कांग्रेस ने सेंध लगा दी है. हालांकि कांग्रेस को आंतरिक गुटबंदियों पर जीत पाने की जरूरत होगी. इस चुनाव ने यूपी के लिए सबक दिया है. नतीजों ने साफ संकेत दिए हैं कि बीजेपी से मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों को गठजोड़ की राजनीति, सीट बंटवारे को लेकर सफाई की जरूरत है. 2019 में देश गठजोड़ की राजनीति में वापसी करेगा. नतीजे के बाद बीजेपी के लिए कई सवाल खड़े हो गए हैं. खासकर छत्तीसगढ़ में गरीब, पिछड़े इलाकों में बीजेपी का वोट शेयर गिरा है. हालांकि शहरी इलाकों में इनकी पकड़ बरकरार है. उज्‍ज्‍वला, मुद्रा, फसल बीमा जैसी योजनाओं का लाभ बीजेपी को नहीं मिल पाया. साफ है कि गांव, गरीब, किसान, बेरोजगार युवा और दलितों के मुद्दे, बीजेपी के लिए ये 5 बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं.

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को मिली जीत ने एक बार फिर से बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब अमित शाह की रणनीति असफल रही है. बल्कि इससे पहले भी तीन बार अमित शाह की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई थी. पांच राज्यों के चुनाव के नतीजों से पहले भी तीन राज्यों मसलन, कर्नाटक, दिल्ली और बिहार ने अमित शाह की चुनावी रणनीति को ध्वस्त कर दिया है.

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वहीं 5 राज्यों में से 2 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह NOTA बना है. पाचों राज्यों में भारी संख्या में मतदाताओं ने किसी भी पार्टी को वोट नहीं देकर NOTA का बटन दबाया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में तो भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच वोटों का जितना अंतर है उससे ज्यादा वोट तो NOTA में डाले जा चुके हैं. सभी पाचों राज्यों में NOTA के तहत डाले गए वोटों की संख्या 12 लाख के भी पार पहुंच गई है. वोटों की गिनती के हिसाब से देखें तो मध्य प्रदेश में करीब 4.15 लाख से ज्यादा, छत्तीसगढ़ में 1.78 लाख से ज्यादा, राजस्थान में 4.38 लाख से अधिक, तेलंगाना में 2.03 लाख से ज्यादा और मिजोरम में तीन हजार से ज्यादा वोट NOTA को गए हैं.

वहीं बीजेपी की हार पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी के बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा है कि हार की वजह सवर्णों का अपमान है. बलिया जिले की बैरिया सीट से विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि बीजेपी सवर्णों का अपमान करके जीत का सफर तय नहीं कर सकती. एससी-एसटी ऐक्ट में संशोधन का फैसला आत्मघाती था. चुनाव के नतीजे अपेक्षा के मुताबिक रहे हैं. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि बीजेपी को इन चुनावों में जनता ने आंशिक रूप से सबक दिया है. अगर पार्टी ने एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर अपने फैसले पर दोबारा विचार नहीं किया तो लोकसभा चुनावों के दौरान भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा. बीजेपी विधायक ने सवर्णों को बीजेपी का परंपरागत मतदाता बताते हुए अपनों का साथ नहीं छोड़ने की नसीहत भी दी.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि आप बीजेपी की हार से खुश हैं या दुखी हैं?

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