Home Facts इंसानों से अलग है जानवरों में बच्चों को जन्म देने का तरीका

इंसानों से अलग है जानवरों में बच्चों को जन्म देने का तरीका

by Gwriter

दोस्तों, आपने कहीं न कहीं यह तो जरूर सुना होगा कि बच्चे को जन्म देना दुनिया में सबसे ज्यादा दर्द भरा होता है. इसमें लगभग 206 हड्डियों के एक साथ टूटने जितना दर्द भी होता है. तो आपको बता दे कि यह सच है. जी हां, जब एक मां अपने बच्चे को जन्म देती है तो उसे इतना दर्द सहन करना पड़ता है. लेकिन इस दर्द का सामना सिर्फ इंसान ही नहीं करते हैं. जानवरों को भी बच्चे को जन्म देते समय बहुत दर्द होता है. एक मादा चिता तो बच्चे को जन्म देने के बाद सुन्न तक पड़ जाती है. आपने आमतौर पर महिलाओं के बच्चे पैदा करने की कहानियां और उनके दर्द का अनुभव जाना होगा. लेकिन आज हम आपको जानवरों के बच्चे पैदा करने की कहानियां और उससे जुड़े उम्दा किस्से बताएंगे.

दोस्तो, क्या आपको पता है कि कंगारू के बच्चे पैदा करने की प्रक्रिया इंसानों और जानवरों में सबसे अलग है? अगर नहीं तो कोई बात नहीं आज हम आपको बताएंगे कि जानवर बच्चों को जन्म कैसे, कब और किस माहौल में देना पसंद करते हैं? इसी के साथ आपको यह भी बताएंगे कि इंसानों में बच्चा पैदा होने के बाद रोता है तो जानवरों के बच्चे पैदा होने के बाद किस तरह के क्रियाकलाप करते दिखाई पड़ते हैं. चलिए जानते हैं जानवरों के बच्चे पैदा करने से जुड़े कुछ एमेजिंग फेक्ट्स?

दोस्तों, बच्चे के जन्म से खूबसूरत लम्हा कोई नहीं होता है. बच्चा चाहे इंसानों का हो या जानवर का, दोनों के लिए ही बच्चे का जन्म किसी जश्न से कम नहीं होता है. इंसानों में मां जब पहली बार बच्चे को देखती है तो उसे सहलाती और चूमती है, वहीं जानवरों में बच्चें को चाटने की प्रथा रही है यानि जानवरों के जरिए बच्चे को चाटकर अपना प्यार दिखाया जाता है. कई जानवरों में तो मादा जानवर के प्रसव के दौरान नर पशु पहले तो उसका समर्थन करता है फिर बच्चे को चाटकर उसे दुलार और साफ करता है. कुछ जानवरों में जन्म देने के प्रक्रिया काफी सरल होती है. उन्हें जब महसूस होता है कि बच्चे की पेट में रहने की समय सीमा अब खत्म हो चुकी है तो वह उसे घास या रेत या अन्य सॉफ्ट स्थान पर बैठकर एक झटके में जन्म दे देते हैं यानि उन्हें इंसानों जितना दर्द सहन नहीं करना पड़ता. वहीं कुछ जानवरों को प्रसव के दौरान इतनी ज्यादा परेशानी और दर्द होता है कि वह बेहोश तक हो जाते हैं. साथ ही जब बच्चा जन्म ले लेता है तो उनसे हिला भी नहीं जाता है.

दोस्तों, इंसानों और जानवरों में बच्चे के जन्म लेने के प्रक्रिया में बहुत से अंतर और समानताएं हैं. इंसान एक बार में अधिकतम दो बच्चों को जन्म दे सकता है. वहीं जानवरों में एक साथ तीन से लेकर 12 बच्चों को जन्म देने की क्षमता होती है. जानवरों की कुछ प्रजातियों में तो बच्चों का रंग मां से मेल भी नहीं खाता है. साथ ही दो बच्चों के रंग में भी विभिन्नताएं साफ नजर आती है. कुछ जानवरों में तो बच्चे पैदा होने के 2-5 मिनट के अंदर ही खड़े होकर मां के साथ चलने लायक हो जाते हैं. वहीं कुछ प्रजातियों में बच्चों को 1 हफ्ते और महीने भर का समय भी लगता हैं. वहीं इंसानों में बच्चों को चलना सीखने में कम से कम एक साल का वक्त लगता है. तो चलिए दोस्तों, अब आपको जानवरों के बच्चे जन्म कैसे लेते हैं इसकी जानकारी देते हैं?

हाथी: दोस्तों, हाथियों में बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया लगभग इंसानों जैसी ही है. एक हथनी लगभग 22 महीनों तक अपने बच्चे को पेट में रखती है. साथ ही हथनियों को दिन में बच्चे को जन्म देना पसंद नहीं होता है. वह आमतौर पर बच्चे को रात में ही जन्म देना ज्यादा पसंद करती है. हथनियां दिन भर प्रसव पीड़ा सहन कर रात में बच्चे को अपने पेट से बाहर आने देती है. बच्चे के जन्म की प्रक्रिया बिल्कुल सिंपल है. हथनी बच्चे को जन्म देने के समय पीछे के पैरों से थोड़ा झुकती है और बच्चा बाहर आ जाता है. दोस्तों, आपको जानकर हैरानी होगी कि हाथी का बच्चा जब पैदा होता है तो उसका वजन लगभग 114 किलो होता है. इसी के साथ हाथियों को किसी घास या खासतौर पर मिट्टी में बच्चों को जन्म देना पसंद होता है. ऐसा वह इसलिए भी करते हैं जिससे बच्चे को ऊंचाई से गिरने पर चोट न लगे. हाथियों के बच्चों को खड़े होने की जल्दी होती है. लेकिन उनको खड़े होने में लगभग 12 घंटे का समय लगता है. तब तक उसकी मां उसकी देखभाल करती है और उसको चाटकर उसपर लगे खून को साफ करती है.

बाघ: दोस्तों, बाघ में बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया काफी शांति भरी होती है. शिकार के लिए और जंगलों में आपने टाइगर को जितना आवाज करते हुए देखा होगा, उससे बिल्कुल उल्टा बच्चे को जन्म देते समय मादा टाइगर द्वारा किया जाता है. मादा टाइगर को शांति और एकांत में बच्चे को जन्म देना पसंद है. वह बच्चें को जन्म देने के लिए सुरक्षित माहौल चाहती है. बच्चों के जन्म के समय इंसान चिखता है, चिल्लाता है लेकिन मादा टाइगर बच्चे को जन्म देते समय सुन्न पड़ जाती है. मादा टाइगर एक साथ दो बच्चों को जन्म देती है. अन्य जानवरों की तरह मादा टाइगर को भी घास पर बच्चों को जन्म देना पसंद होता है. बच्चों को जन्म के लिए वह जमीन पर लेटकर एक झटके में एक और दूसरे झटके में दूसरे बच्चे को अपने पेट से बाहर निकाल देती है. बच्चों को जन्म देने के बाद मादा टाइगर काफी कमजोर महसूस करती है. साथ ही वह लेटे हुए ही बच्चों को चाटकर साफ करती है और दुलार करती है.

चीता: जानवरों में सबसे तेज रफ्तार रखने वाला चीता जन्म देने की प्रक्रिया में भी किसी सुपरफास्ट ट्रेन से कम नहीं है. मादा चीता एक साथ कई बच्चों को जन्म देती है. आमतौर पर मादा चीता एक साथ 3-5 बच्चों को एक साथ जन्म दे सकती है. दोस्तों, चीतों में रफ्तार के साथ एक खूबी और होती है, वह काफी ज्यादा सेंस्टिव भी होते हैं. मादा चीता भी जन्म देने के लिए एक शांत जगह को ही चुनती है. इंसानों और बाघ से अलग हटकर मादा चीता जन्म देने की प्रक्रिया में काफी तेज है. मादा चीता को जब अंदेशा होता है कि वह बच्चे को जन्म देने वाली है तो वह एक शांत जगह जाकर नीचे बैठकर एक झटके में बच्चे को बाहर निकाल देती है. वह एक बार में 1-2 बच्चों को बाहर निकालने की क्षमता रखती है. वहीं चीतों में बच्चों को जन्म देने में मुश्किल से 1 मिनट का समय लगता है. बच्चों को जन्म देने के बाद मादा चीता लेटकर बच्चों को चाटना और उनपर लगा खून साफ करना पसंद करती है.

डोलफिन: दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि पानी में रहने वाली डोलफिन बच्चे को जन्म कैसे देती होगी? क्या वह भी इंसानों की तरह बच्चों को जन्म देती है या उस प्रजाति में बच्चों को जन्म देने की कोई और प्रक्रिया है? चलिए हम आपको बताते हैं. डोलफिन को बच्चे पैदा करते हुए देखना किसी लक्की डे से कम नहीं हैं. यानि डालफिन द्वारा बच्चों को जन्म देते देखना कोई आम बात नहीं है. वह पानी में रहती है. साथ ही बच्चों को पैदा करने की प्रक्रिया उसमें थोड़ी अलग है. डोलफिन बच्चे को जन्म देने से पहले उसके फिन्स को बॉडी से बाहर निकालती है. इसी के साथ वह लगातार पानी में तैरते हुए बच्चे को जन्म देती है. बेबी डोलफिन मां के पेट से ही तैरना सीख कर आता है. मादा डोलफिन बच्चे के फिन को बाहर निकाले हुए अचानक से अपने बच्चे को शरीर से बाहर निकाल देती है. साथ ही बच्चा बाहर आते ही मादा डोलफिन के साथ तैरने लगता है. दोस्तों, आपको जानकर हैरानी होगी कि मेमल्स प्रजाति में डोलफिन के बच्चे सबसे पहले चलना सीखते हैं.

स्टींगरे: दोस्तों, मछलियों की तरह ही स्टींगरे पानी में रहने वाला एक जीव है. इसमें बच्चों को जन्म देने की अलग ही क्षमता है. स्टिंगरे एक साथ 12 बच्चों को जन्म देने की क्षमता रखता है. इसी के साथ स्टिंगरे एक साथ 5-6 बच्चों को जन्म दे सकती है. दोस्तों, स्टींगरे पानी में रहते हुए एक के बाद एक और कई बार एक साथ कई बच्चों को जन्म देती है. बच्चों को जन्म देते हुए वह पानी काफी तेज स्विंग भी करती है.

राइनो: जानवरों के बच्चों के जन्म की इस सूची में अगला नाम राइनो का है. दोस्तों, राइनो जैसे विशालकाय जानवर को जन्म देते देखना काफी अलग अनुभव होता है. मादा राइनो अपने बच्चे को 18 महीने तक पेट में रखती है. इसी के साथ वह 2-3 सालों में ही एक बच्चे को जन्म दे पाती है. दोस्तों, हाथियों की तरह ही मादा राइनो भी बच्चे को जन्म देने के लिए मिट्टी की तलाश करती है, साथ ही वह हल्का सा पीछे से झुककर बच्चे को अपने शरीर से नीचे गिरा देती है. दोस्तों, बेबी राइनो का जब जन्म होता है तो वह लगभग 45 किलो का होता है. इसी के साथ राइनो का बच्चा शुरूआत में काफी कमजोर होता है. पैदा होने के बाद उससे ऊपर उठा भी नहीं जाता है. इंसानों की तरह मादा राइनो भी अपने बच्चे की देखभाल करते हुए उसे उठना और चलाना सीखाती है. इसी के साथ जब तक बेबी राइनो काफी कमजोर रहता है मादा राइनो भी उसके पास ही रहती है.

समुद्री शेर: दोस्तों, समुद्री शेर एक ऐसा जानवर है जो बच्चों को जन्म देते हुए ठीक इंसानों जैसा ही दर्द महसूस करता है. इंसानों की तरह ही सी लॉयन की भी बच्चों को जन्म देने में हालत खराब हो जाती है. समुद्री शेर को बच्चे को जन्म देने से पहले लगभग 7 घंटे तक प्रसव पीड़ा का सामना करना पड़ता है. दोस्तों, मादा सी लॉयन का नर सी लॉयन प्रसव के दौरान और बाद में काफी ख्याल रखता है. कई बार 7 घंटे के दर्द के बाद आराम से सी लॉयन बच्चे को बाहर निकालने में सक्षम रहते हैं लेकिन कई बार किस्मत उनका साथ नहीं देती और 7-9 घंटे का समय लग जाता है.

जिराफ: दोस्तों, हम सभी यह जानते हैं कि जिराफ की लंबाई काफी ज्यादा होती है. ऐसे में प्रसव के दौरान जिराफ का बच्चा काफी ऊंचाई से गिरता है. ऐसे में वह बचता कैसे है? यह भी एक सवाल है. लेकिन इसका जवाब भी मादा जिराफ के पास ही है. दोस्तों, मादा जिराफ भी अन्य जानवरों की तरह बच्चों को मिट्टी या घास में पैदा करना पसंद करती है जिससे उनके बच्चे को कम चोट लगे. हालांकि जिराफ में यह एक प्राकृतिक नियम है तो बच्चे पहले से ही 3 मीटर की ऊंचाई से गिरने की तैयारी करके पैदा होता है. जिराफ द्वारा बच्चा पैदा करने में नर उसकी मदद करता है. वह उसके साथ प्रसव के दौरान मौजूद रहता है. इसी के साथ बच्चा पैदा होने के बाद बेबी जिराफ काफी कमजोर रहता है. बचपन से ही उसकी टांगे काफी लंबी होती है. पैदा होते ही इतनी लंबी और पतली टांगों से खाड़ा हो पाना उसके लिए मुश्किल होता है. हालांकि जब तक बेबी जिराफ खड़ा होना नहीं सीख लेता है, मदा जिराफ उसकी अच्छे से देखभाल करती है.

घोड़ा: दोस्तों, घोड़ो में बच्चे को जन्म देना काफी आम-सा लगता है. घोड़ी को शांत और अकेले रहकर बच्चे को जन्म देना पसंद होता है. इसी के साथ वह सॉफ्ट घास पर बच्चे को जन्म देना पसंद करती है. घोड़ी जमीन पर बैठती है और बच्चा बाहर आ जाता है. दोस्तों, घोड़ो के बच्चों में खास बात यह है कि वह पैदा होने के कुछ देर बाद ही खड़े होने की क्षमता रखते हैं. साथ ही वह पैदा होने के कुछ देर बाद घोड़ी के साथ मैदान में घूमने भी निकल जाते हैं.

कंगारू: दोस्तों, कंगारूओं में बच्चे बड़ी आसानी से पैदा होते हैं. मादा कंगारू के पेट में बच्चा आने के 33 दिन के बाद ही बच्चा बाहर आ जाता है. वह साइज में काफी छोटा होता है. बेबी कंगारू का वजर कुछ ग्राम में होता है वह मादा कंगारू के पेट के बाहर निकलकर उसकी थैली में चला जाता है. साथ ही वह कई महीनों तक उसकी थैली में ही रहता है. जब वह पूरा विकसित हो जाता है. तभी मादा कंगारू की थैली से बाहर आता है.

दोस्तों, यह तो थी जानवरों में बच्चे पैदा होने की कहानियां. हर जानवर का बच्चे को जन्म देने का अपना एक तरीका होता है. कुछ जानवरों के बच्चे समय के हिसाब से मजबूत और कुछ कमजोर होते हैं. लेकिन कुछ हफ्तों के बाद सभी जानवरों के बच्चे खुद खड़े होने की क्षमता रखने लगते हैं. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि आपको कौनसा जानवर पसंद है.

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