दुनिया में मौजूद हैं इतनी छोटी चीजें, जिन्हें आंखों से भी नहीं देखा जा सकता

हमारी आंखे शरीर का काफी अहम हिस्सा होती है. इन आंखों के जरिए हम दुनिया की हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी चीज को देख सकते हैं. लेकिन इस दुनिया में कई चीजें ऐसी भी जिन्हें हम अपनी आंखों के सहारे नहीं देख सकते हैं. इनमें कई सूक्ष्म जीव शामिल होते हैं. इन सूक्ष्म जीव की खासियत ये होती है कि इन्हें हम अपनी नंगी आंखों से नही देख सकते हैं और इन्हें देखने के लिए माइक्रोस्कोप का सहारा लेना पड़ता है. लेकिन अगर आपके पास माइक्रोस्कोप नहीं है तो आज हम यहां आपको बताते हैं दुनिया में मौजूद वो सूक्ष्म जीव कौन-कौनसे हैं… आइए जानते हैं.

स्पर्म
स्पर्म यानि शुक्राणु का आकार सूक्ष्म धागेनुमा संरचना का होता है. शुक्राणु के उत्पन्न होने की प्रक्रिया को शुक्रजनन या स्पर्मेटोजेनेसिस कहा जाता है. शुक्राणु नर युग्मक होते है. वहीं शुक्राणुओं की संरचना अलग-अलग जीवों में अलग-अलग प्रकार की होती है. जैसे- इंसानों में चम्मच के आकर का, चूहे में हुक के आकर का, एस्केरिस में अमिबोइड और बिना पूंछ के, क्रिस्टेशियन जीवों में तारेनुमा और पक्षियों में सर्पिलाकार होता है. शुक्राणु जब नर के पास रहते हैं तो एक जगह इकट्टठा रहकर ये गतिहीन रहते हैं. लेकिन जब ये शुक्राणु मादा की योनि में जाते हैं तो योनि के भीतर 2mm प्रति मिनट की चाल से गति करते हैं.

जीवाणु
जीवाणु एक एककोशिकीय जीव है. इसका आकार कुछ मिलिमीटर तक ही होता है. इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़ जैसी हो सकती है. ये अकेन्द्रिक, कोशिका भित्तियुक्त, एककोशकीय सरल जीव हैं जो सभी जगह पाए जाते हैं. ये धरती पर मिट्टी में, अम्लीय गर्म जल-धाराओं में, नाभिकीय पदार्थों में, जल में, भू-पपड़ी में, यहां तक की कार्बनिक पदार्थों में और पौधौं के अलावा जानवरों के शरीर में भी पाए जाते हैं. साधारण तौर पर देखा जाए तो एक ग्राम मिट्टी में 8 करोड़ जीवाणु और 1 मिलीलीटर पानी में 10 लाख जीवाणु पाए जाते हैं.

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प्रोटोजोआ
प्रजीवगण यानि प्रोटोजोआ एक एककोशिकीय जीव है. इनकी कोशिका प्रोकैरियोटिक प्रकार की होती है. ऐतिहासिक रूप से प्रोटोजोआ को एक सेल वाले जानवर के रूप में जाना जाता था, क्योंकि उनमें अक्सर जानवरों की तरह व्यवहार होते हैं, जैसे कि गतिशीलता. वहीं पौधों और कई शैवाल में पाए जाने वाले सेल दीवार की कमी भी होती है. हालांकि जानवरों के साथ प्रोटोजोआ के समूह के पारंपरिक अभ्यास को अब मान्य नहीं माना जाता है.

फफूंद
फफूंद या कवक एक प्रकार के पौधे हैं जो अपना भोजन सड़े गले मरे हुए कार्बनिक पदार्थों से हासिल करते हैं. ये संसार के शुरू से ही दुनिया में मौजूद हैं. इनका सबसे बड़ा फायदा दुनिया में अपमार्जक के तरह काम करना है. इनके जरिए दुनिया में कचरा हटा दिया जाता है. इनमें प्रजनन बीजाणुओं के जरिए होता है. वहीं इनमें कोई जड़, तना और पत्तियां नहीं होतीं.

शैवाल
ज्यादातर शैवाल पौधों के समान सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के जरिए अपना खाना खुद बनाते हैं. ये एक कोशिकीय से लेकर बहु-कोशिकीय कई रूपों में हो सकते हैं, लेकिन पौधों की तरह इसमें जड़, पत्तियों की रचनाएं नहीं पाई जाती हैं. ये नम भूमि, अलवणीय और लवणीय जल, वृक्षों की छाल, नम दीवारों पर हरी, भूरी या कुछ काली परतों के रूप में मिलते हैं.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बताएं कि स्पर्म का रंग कैसा होता है.

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