आधार कार्ड पर लेमिनेशन या प्लास्टिक चढ़ाने वालों के लिए बुरी खबर, उनका आधार फर्जी है!

आधार कार्ड आज हर भारतीय की जरूरत बन गया है. आधार कार्ड के बिना कई काम अधूरे रह सकते हैं. वहीं आधार कार्ड से जुड़ी जानकारियां कई बार चोरी होने का डर भी लगा रहता है. ऐसे में आधार से जुड़ी एक और बात सामने आ गई है. अगर आपने अपने आधार का लेमिनेशन करवा रखा है तो आपके लिए परेशानी खड़ी हो सकती है. अगर आपने अपने आधार कार्ड का लेमिनेशन करा रखा है या फिर प्लास्टिक स्मार्ट कार्ड के तौर पर उसे इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान रहें. ऐसा करने पर आपके आधार का क्यूआर कोड काम करना बंद कर सकता है या फिर निजी जानकारी चोरी हो सकती है. UIDAI ने इनके इस्तेमाल पर चिंता जताई है. UIDAI ने कहा कि प्लास्टिक आधार कार्ड के इस्तेमाल से डेटा लीक होने की आशंका भी रहती है. UIDAI के मुताबिक लोग साधारण पेपर पर आधार डाउनलोड करें या फिर mAadhaar का इस्तेमाल करें.

देखें वीडियो

UIDAI के मुताबिक आधार लेटर, इसका कटअवे पोर्शन, साधारण कागज पर डाउनलोडेड वर्जन और mAadhaar पूरी तरह वैध है. प्लास्टिक या पीवीसी आधार स्मार्ट कार्ड्स अक्सर गैर-जरूरी होते हैं. इसकी वजह यह होती है कि क्विक रेस्पॉन्स कोड आमतौर पर काम करना बंद कर देता है. इस तरह की गैर-अधिकृत प्रिंटिंग से क्यूआर कोड काम करना बंद कर सकता है. वहीं UIDAI ने लोगों को इस बात के लिए आगाह किया है कि वे अपना आधार नंबर और पर्सनल डिटेल किसी भी अनाधिकृत एजेंसी से शेयर ना करें. इसे लैमिनेट या प्लास्टिक कार्ड पर प्रिंट कराते वक्त भी ऐसा ना करें.

आधार से जुड़ा ये नियम तोड़ने पर लगेगा 1 करोड़ रुपए का जुर्माना! कंगाल हो सकते हैं आप

वहीं भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई साझा सेवा केंद्रों यानी सीएससी को आधार पंजीकरण और उन्हें अपडेट करने संबंधी गैर-बॉयोमैट्रिक सेवायें उपलब्ध कराने की अनुमति दे सकता है. उन्हें लोगों के लिये ऑनलाइन फॉर्म भरने में मदद देने जैसी सेवाओं देने की अनुमति भी दी जा सकती है. सीएससी का संचालन करने वाले गांव स्तर के उद्यमी यानी वीएलई उन्हें आधार पंजीकरण और उससे जुड़ी जानकारी को अपडेट करने संबंधी सेवायें फिर से शुरू करने की परमिशन देने का सरकार से रिक्वेस्ट करते रहे हैं. इससे पहले 120 करोड़ आधार धारकों के बॉयोमैट्रिक आंकड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूआईडीएआई ने इन केंद्रों और निजी सेवा प्रदाताओं को ये सुविधाएं उपलब्ध कराने से रोक दिया था.

यूआईडीएआई में चल रही बातचीत से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सीएससी को पंजीकरण और सूचना अपडेट करने से जुड़ी गतिविधियों के लिए ऑनलाइन आधार फॉर्म भरने में आम लोगों की सहायता करने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, इसमें किसी तरह की बॉयोमैट्रिक गतिविधि शामिल नहीं होगी. अधिकारी ने बताया कि ये सेवाएं ग्रामीणों और ऐसे लोगों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं, जो ऑनलाइन व्यवस्था से अवगत नहीं है. इन केंद्रों को मदद के बदले मामूली शुल्क लेने की इजाजत भी दी सकती है. यह प्रस्ताव अधिकतर सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के यूआईडीएआई के प्रस्ताव से भी जुड़ा है.

सरकार ने इससे पहले सीएससी से कहा था, कि सेवाओं को फिर से शुरू करने की अनुमति देने की उनकी अपील पर विचार किया जाएगा. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने नवंबर में एक कार्यक्रम में ग्राम स्तरीय उद्यमियों को संबोधित करते हुये उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिये हर संभव प्रयास करने का भरोसा दिया था.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि आपका आधार आपके लिए कितना फायदेमंद है?

(Visited 1015 times, 1 visits today)

सुझाव कॉमेंट करें

About The Author

आपके लिए :