आधार कार्ड और वोटर ID पर भयंकर फैसला, अब आम आदमी की प्राइवेसी गई तेल लेने!

आज भारत में हर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े काम के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है. हर काम के लिए आज आधार नंबर ग्राहकों को देना पड़ता है. बैंक खाते, पैन कार्ड यहां तक की राशन कार्ड से भी आपका आधार लिंक किया जा चुका है. वहीं अब वोटर आईडी को लेकर भी एक बड़ा फैसला हो सकता है. ये फैसला हर किसी को हैरानी में भी डाल सकता है. दरअसल आधार कार्ड और वोटर आईडी को जल्द ही एक दूसरे से लिंक किया जा सकता है.

चुनाव आयोग आधार और वोटर आईडी को जोड़ने की योजना बना रहा है. इसको कानूनी तौर पर जरूरी बनाने की कयावद चल रही है. इसके लिए कानून में संशोधन करना होगा. ईटी के मुताबिक चुनाव आयोग ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1951 में संशोधन का प्रस्ताव किया है. इसके तहत वोटर आईडी को 12 डिजिट के आधार नंबर से जोड़ना जरूरी किया जाएगा. वहीं प्राइवेसी का खतरा जिन लोगों को सताता है, ऐसे में उनके लिए भी इसमें लोगों की प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखा जाएगा. इसके जरिए फर्जी मतदाताओं पर रोक लगेगी. इस पर चुनाव आयोग कानून मंत्रालय को जल्द ही प्रस्ताव भेजने वाला है. इससे पहले आधार को वोटर आईडी से जोड़ना जरूरी नहीं था. तब मार्च 2015 तक चुनाव आयोग ने करीब 38 करोड़ मतदाताओं के आधार वोटर आईडी से लिंक कर दिए. भारत में अभी करीब 75 करोड़ मतदाता हैं. इसका अर्थ है अभी भी 37 करोड़ मतदाताओं का आधार वोटर आईडी से लिंक नहीं हुआ है.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2015 में आधार पर फैसला दिया. इसके बाद चुनाव आयोग ने आधार और वोटर आईडी का लिंकेज रोक दिया. 2017 में चुनाव आयोग ने फिर सुप्रीम कोर्ट में इसके लिंकेज की मंजूरी के लिए अर्जी दी. इस कदम में सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में दिए फैसले का ध्यान रखा जाएगा. 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि बिना किसी कानूनी आधार के कुछ सेवाओं को आधार के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है. इस मुद्दे पर चुनाव आयोग ने आधार जारी करने वाली अथॉरिटी UIDAI से भी मंजूरी मांगी है. अगर ऐसा होता है तो फर्जी मतदाताओं पर बहुत हद तक रोक लग जाएगी. आधार पैन कार्ड और बैंक अकाउंट से भी लिंक है. कुछ भी गड़बड़ी होने पर एक क्लिक में सब पता चल जाएगा.

वहीं दूसरी तरफ आधार से जुड़ी एक बड़ी खबर ये भी है कि 60 से ज्यादा की उम्र वालों के लिए पासपोर्ट बनवाना अब आसान हो गया है. क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने इस श्रेणी के पासपोर्ट आवेदकों के लिए मात्र आधार कार्ड की अनिवार्यता को रखा है. बूढ़े लोगों को मात्र आधार कार्ड के आधार पर पासपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए गए हैं. बूढ़े लोगों को राहत प्रदान करने का एक मुख्य कारण यह भी है कि साल 2018 में जनवरी से लेकर नवंबर तक कुल आवेदकों में से करीब सात हजार से अधिक पासपोर्ट आवेदन मात्र 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों ने एप्लाई किया था. हालांकि तत्काल पासपोर्ट की संवेदनशीलता को देखते हुए बूढ़े लोगों को सामान्य आवेदकों की तरह ही अपने सभी दस्तावेज जमा कराने होंगे. तत्काल पासपोर्ट हासिल करने के लिए बूढ़े लोगों को भी अन्य आवेदकों की तरह आधार, पेन कार्ड और वोटर आईडी अनिवार्य किए गए हैं. वरिष्ठ नागरिकों के लिए पासपोर्ट बनवाने के लिए न तो कतार में खड़ा होना पड़ेगा और न ही कागजों से भरी फाइल उठानी पड़ेगी. 60 साल के लोगों को मात्र आधार नंबर देने पर उनका पासपोर्ट आवेदन स्वीकार कर लिया जाएगा.

दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि हर जरूरी चीज को आधार कार्ड से लिंक करना कहां तक जायज है?

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