संसद भवन में आतंकी हमला, आतंकवादियों ने सुरक्षाकर्मियों को दिया गच्चा, देश में दहशत का माहौल

इतिहास के पन्नों में कई ऐसी घटनाओं मौजूद है, जो कभी भी भूली नहीं जा सकती है. वहीं इन घटनाओं में से कुछ ऐसी घटनाएं भी होती है जो किसी एक या दो लोगों को नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख देती है. भारत में भी कई ऐसी घटनाएं हुईं हैं जिन पर पूरे देश की निगाहें टिक कर रह गई हैं. इन्हीं घटनाओं में से एक घटना भारत के इतिहास में ऐसी भी है जब भारत के संसद पर आतंकवादी हमले को अंजाम दिया गया था.

13 दिसंबर का दिन इतिहास में देश विदेश की कई बड़ी घटनाओं के साथ दर्ज है. साल 2001 में 13 अगस्त की सुबह आतंक का काला साया देश के लोकतंत्र की दहलीज तक आ पहुंचा था. देश की राजधानी दिल्ली के बेहद महफूज माने जाने वाले इलाके में शान से खड़ी संसद भवन की इमारत में घुसने के लिए आतंकवादियों ने सफेद रंग की एम्बेसडर का इस्तेमाल किया और सुरक्षाकर्मियों को गच्चा देने में कामयाब रहे, लेकिन उनके कदम लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र कर पाते उससे पहले ही सुरक्षा बलों ने उन्हें ढेर कर दिया.

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इस हमले में आतंकी संगठनों लश्‍कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्‍मद के पांच आतंकी 13 दिसंबर 2001 की दोपहर 11.40 बजे डीएल-3सीजे-1527 नंबर वाली अंबेसडर कार से संसद भवन के परिसर में गेट नंबर 12 की तरफ बढ़े. गृह मंत्रालय और संसद के लेबल वाले स्‍टीकर गाड़ी पर लगे होने के कारण एंट्री मिल गई. उससे ठीक पहले लोकसभा और राज्‍यसभा 40 मिनट के लिए स्‍थगित हुई थी और माना जाता है कि तत्‍कालीन गृह मंत्री लालकृष्‍ण आडवाणी समेत करीब 100 संसद सदस्‍य उस वक्‍त सदन में मौजूद थे. इसके बाद सबसे पहले सीआरपीएफ की कांस्‍टेबल कमलेश कुमारी ने आतंकियों को देखा और तत्‍काल अलार्म बजाया. आतंकियों की गोली में मौके पर उनकी मौत हो गई. एक आतंकी को जब गोली मारी गई तब उसकी सुसाइड वेस्‍ट से विस्‍फोट हो गया और बाकी चार आतंकियों को भी सुरक्षाबलों ने मौत के घाट उतार दिया.

13 दिसंबर 2001 को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच हथियारबंद आतंकियों ने संसद पर हमला किया था. इस हमले में संसद की सुरक्षा में लगे कई जवान शहीद हुए थे, वहीं पांचों आतंकी भी मार गिराए गए थे. 13 दिसंबर 2001 को संसद की कार्यवाही स्थगित होने के थोड़ी देर बाद दोपहर साढ़े ग्यारह के करीब पांच आतंकियों ने हमला बोल दिया. इस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस के पांच जवान समेत एक CRPF महिला कॉन्स्टेबल और संसद के दो गार्ड शहीद हो गए थे, साथ ही कई जवान घायल भी हुए थे. दिल्ली पुलिस के पांच सुरक्षाकर्मी नानक चंद, रामपाल, ओमप्रकाश, बिजेन्द्र सिंह और घनश्याम के अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक महिला कांस्टेबल कमलेश कुमारी और संसद सुरक्षा के दो सुरक्षा सहायक जगदीश प्रसाद यादव और मातबर सिंह नेगी इस हमले का बहादुरी से सामना करते हुए शहीद हो गए थे. इस हमले में एक कर्मचारी देशराज भी शहीद हुए थे.

इस आमने सामने की लड़ाई में सभी आतंकियों को मार गिराया गया था. इस हमले की साजिश रचने वाले अफजल गुरु को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसकी दया याचिका राष्ट्रपति के जरिए खारिज करने के बाद 9 फरवरी 2013 को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई.

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