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ये है दुनिया की सबसे महंगी दवा, 14 करोड़ रुपये है इसका दाम

हम आपको दुनिया की एक सबसे महंगी दवा के बारे में बताने जा रहें है। इस दवा की कीमत है 14 करोड़ रुपये। इस दवा का इस्तेमाल जोल्गेंस्मा (Zolgensma) नाम की थेरेपी में होता है।

दोस्तों, आज का विषय आपको एक पल के लिए ज़रूर हैरान कर सकता है। जिसमें हम आपको दुनिया की एक सबसे महंगी दवा के बारे में बताने जा रहें है। अब हम ज्यादा suspense बनाए बगैर सबसे पहले आपको इसकी कीमत के बारे में बताते है। तो इस दवा की कीमत है 14 करोड़ रुपये। Friends सर्दी-जुखाम,खासी,सिर दर्द के अलावा इंसान का शरीर अनेक रोगों से ग्रस्त हो जाता है। कईयों का इलाज जल्दी और सस्ते दाम में हो जाता है। तो कुछ cancer और tumor जैसी बड़ी बीमारियों के इलाज में इंसान के लाखों-लाख रुपये खर्च हो जाते है और ऐसी बीमारियाँ बड़े लंबे समय तक पीछा भी नहीं छोड़ती है।

वैसे तो हम सभी cancer और tumor जैसी बीमारी की गंभीरता को जानते है। इसके नाम से ही इंसान के मन में डर पैदा हो जाता है। लेकिन आखिरी ऐसी कौनसी दूसरी बीमारी है, जिसके इलाज के लिए व्यक्ति को 14 करोड़ रुपये जितनी बड़ी कीमत अदा करनी पड़ती है? तो चलिए जानते है इस बीमारी के बारे में, जिसकी मदद से आप यह भी समझ पाएंगे कि आखिर उसकी दवा इतनी महंगी क्यूँ है??

दरअसल, इस बीमारी का कनैक्शन है व्यक्ति के spine से। व्यक्ति के रीढ़ से जुड़ी ये बीमारी बड़ी खतरनाक होती है। ये तो हम सभी जानते है कि दिमाग पूरे शरीर को operate करता है और हमारी spine सीधे तौर पर दिमाग से ही जुड़ी होती है। जो brain से signal लेकर पूरे शरीर की functioning को बनाए रखती है। ऐसे में spine में हुई कोई भी गड़बड़ी शरीर के बाकी हिस्सों पर बुरा असर डालती है। दोस्तों, इस दवा का इस्तेमाल जोल्गेंस्मा (Zolgensma) नाम की थेरेपी में होता है।

इस थेरेपी के द्वारा डॉक्टर मरीज के स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉपी (spinal muscular atrophy) का इलाज करता है। रीढ़ की हड्डी में मोटर न्यूरॉन्स में कमी आ जाने से हालात काफी तकलीफदेह बन जाते है। इसी के कारण स्पाइनल कॉर्ड में मोटर नर्व सेल्स पर भी बुरा असर पड़ता है। मोटर नर्व सेल्स की मदद से ही body की moment हो पाती है। यानि बिना इसके बेशक पीड़ित व्यक्ति कितना ही सोचे अपने हाथ-पाव हिलाने का, पर वो ऐसा कर नहीं पाता। नर्व सेल्स खतम होने के कारण ही brain से मांसपेशियों को कंट्रोल करने वाले signal बंद हो जाते है।

 

इस बीमारी को जेनेटिक माना गया है, जोकि शिशुओं और बच्चों में ज्यादा होती है। दरअसल, इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के अंदर उनके माता-पिता की एक-एक टूटी जीन की प्रतियां होती है। इसी कारण से उनकी body में एक खास तरह का प्रोटीन नहीं बन पाता है। जिसके कारण मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली कोशिकाएं मर जाती हैं और पीड़ित व्यक्ति के लिए शरीर की मांसपेशियों का इस्तेमाल करना बड़ा कठिन हो जाता है। ये एक प्रकार से शरीर में होने वाला मसल-वेस्टिंग डिसऑर्डर है। पीड़ित व्यक्ति के चलने-फिरने, खाने-पीने पर तो इस बीमारी का असर पड़ता ही है, लेकिन कुछ की तो इसके चलते मौत तक हो जाती है।

इसकी गंभीरता को देखते हुए ही स्वीटजरलैंड की एक मशहूर फार्मेसी कंपनी नोवार्टिस (Novartis) ने एक ऐसी नई जीन थेरेपी लेकर आई जिसे खुद अमेरिका मंजूरी दे चुका है। तो इस तरह Spine से जुड़ी गंभीर बीमारी के समाधान के लिए 21 लाख डॉलर यानी, करीब 14 करोड़ रुपये की महंगी दवा की खोज हुई। ये थेरेपी एक ही बार में spinal muscular atrophy बीमारी का इलाज करती है।

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