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भाई-भाई के बीच झगड़ा क्यों होता है?

कई बार देखने में आता है कि बड़ा भाई छोटे भाई को मारने या नोचने लगता है. अगर वह ऐसा करे तो ज्यादा नुकसान होने से पहले हटा दें. शिशु को मारने-नोचने पर उसे सजा देकर बात का बतंगड़ न बनाएं. अगर आप डांटेंगे तो छोटे के प्रति बड़े की नफरत बढ़ेगी.

भाई−भाई में झगड़ा हो गया. इतने जोर से हो गया कि लोग तमाशा देखने लगे. बचपन में भाई-भाई के बीच की लड़ाई मां-बाप सुलझा देते थे. लेकिन जैसे-जैसे बड़े होते गए, वैसे झगड़ा भी बड़ा होता गया. लेकिन आखिर भाई-भाई में झगड़ा क्यों होता है? आखिर ऐसी क्या वजह रहती है कि भाई अपने भाई से ही दुश्मनी मोल ले लेता है. आइए जानते हैं इस बारे में कि आखिर भाई-भाई में झगड़ा क्यों होता है.... लेकिन दोस्तों, अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जल्द सब्सक्राइब कर लें.... तो आइए शुरू करते हैं...

दोस्तों, बड़ी पुरानी कहावत है कि जर, जमीन, जोरू और जायदाद.... जिसके पास भी तो झगड़ा होना लाजमी है. और भाईयों के बीच भी मोटे तौर पर इन्हीं चीजों के लिए झगड़ा होता है. यही वो चीजें है जो झगड़े का कारण बनती है. ईर्ष्या बहुत स्वाभाविक मनोभाव है, लेकिन जब ये भाई-बहनों के बीच शुरू हो जाती है तब स्थिति बड़ी विकट हो जाती है. मनोविज्ञान की भाषा में इसे ‘सिबलिंग राइवलरी’ कहा जाता है. भाई-बहनों में थोड़ी बहुत जलन होना तो स्वाभाविक ही है. 

लेकिन आज के वक्त में दौलत-जायदाद को लेकर भाई-भाई में झगड़ा हो रहा है. आधुनिक समय में रिश्तों की परिभाषा बदल चुकी है. जबकि हमारे धार्मिक ग्रंथ रामायण में बड़े भाई को सर्वोपरि रखा जाता था. परिवार में बड़े भाई की बात कानून की तरह मानी जाती थी. लक्ष्मण और भरत इसका साक्षात प्रमाण हैं, जबकि महाभारत में लालच की वजह से भाइयों कौरव और पांडवों में हिंसा का रूप सामने आया. जिसके बाद दोनों के बीच महाभारत का युद्ध हुआ. आज के समय में महाभारत की तरह अपने स्वार्थो को लेकर भाइयों में ईर्ष्या, लड़ाई-झगड़ा देखने को मिल रही है. हालांकि पुराने समय से जमीन-जायदाद को लेकर भाइयों में झगड़ा होता था. इस थीम को लेकर कई फिल्में भी बनी हैं जैसे दीवार, वक्त, राम-लखन, कमीने आदि. जिनमें दो भाईयों के बीच दौलत को लेकर झगड़े होते हैं.

मनोविश्लेषकों की मानें तो ऐसे हालात तब आते हैं जब व्यक्ति अपने को अकेला महसूस करता है. किसी प्रिय चीज के खोने का डर सताए तब भी भाईयों के बीच झगड़े होते हैं. मसलन कारोबार, पावर खत्म होने, किसी प्रिय से बिछड़ने का खौफ हो सकते हैं. उसे लगता है कि लोगों के बीच वह हमेशा की तरह पॉपुलर रहे. ऐसे में जब उसका अपना भाई बाजी मारने लगे तो वह बर्दाश्त नहीं कर पाता और उसके मन में बचपन से दबी ईर्ष्या की भावना कई तरह से सामने आती है. कभी एक-दूसरे पर आरोप लगाकर या कभी लड़ाई-झगड़ा करके अपनी भड़ास निकालते हैं. इसी का एक उदाहरण प्रमोद महाजन का भाई प्रवीण महाजन भी है.

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देखा जाए तो माता पिता की परवरिश इस मामले में काफी मायने रखती है. दो बच्चों के बीच तुलना करके माता-पिता ही बच्चे में जलन पैदा करते हैं. दूसरे बच्चे के आने की खुशी सबसे ज्यादा पहले बच्चे को ही होती है क्योंकि उसके लिए यह निराला अनुभव होता है. वह नए बच्चे से प्यार भी करता है, पर जब सबका ध्यान दूसरे बच्चे की तरफ ज्यादा होता है तो उसे असुरक्षा का भाव सताने लगता है. तब पहला बच्चा खुद को अकेला महसूस करने लगता है. उसे लगता है कि उसका हक उससे छिन गया है, जैसे उसका कमरा, खिलौने, मम्मी की गोद सब छिन गया है. जलन की वजह से वह दूसरे बच्चे के साथ अजीब-अजीब हरकतें करने लगता है. मसलन उसे अकेले में मारना, डराना, उसका काम बिगाड़ना, अपने से आगे निकलने न देना जैसे काम बचपन में ही शुरू हो जाते हैं.

अगर माता-पिता बचपन की इस ईर्ष्या को सही ढंग से संभालने में नाकाम रहते हैं, तो आगे चलकर इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं. बच्चे में ईर्ष्या और दूसरों से श्रेष्ठ होने का भाव जैसी सोच को अलग नहीं कर सकते. कई बार ऐसा समय भी आता है जब आपको अपना प्रिय भी बुरा लगने लगता है. ज्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि दो भाइयों या दो बहनों की तुलना में भाई-बहन के रिश्ते में सिबलिंग राइवलरी की भावना कम होती है. प्राकृतिक तौर पर भी भाई और बहन का व्यक्तित्व अलग होता है, उनके शौक, इच्छाएं काम करने के तरीके अलग होते हैं. जबकि भाईयों में सिबलिंग राइवलरी की भावना ज्यादा होती है. 

मनोचिकित्सक कहते हैं बचपन में ही सही परवरिश की जानी चाहिए. ताकि आगे चलकर भाई-भाई के बीच किसी तरह के झगड़े की गुंजाइश न रहे. ऐसे में आइए जानते हैं कि बचपन में आप भाइयों के बीच प्यार कैसे पैदा कर सकते हैं.

शुरुआत हमेशा शुरू से होती है. दोस्तों, जब गर्भ में शिशु पैर चला रहा हो तो बड़े बच्चे का हाथ गर्भ के ऊपर रखकर उससे कहें कि वह छोटे को हलो कहे. अगर शिशु को स्तनपान कराते समय बड़ा बच्चा भी स्तनपान की जिद्द करे तो उसे भी करने दें.

कई बार देखने में आता है कि बड़ा भाई छोटे भाई को मारने या नोचने लगता है. अगर वह ऐसा करे तो ज्यादा नुकसान होने से पहले हटा दें. शिशु को मारने-नोचने पर उसे सजा देकर बात का बतंगड़ न बनाएं. अगर आप डांटेंगे तो छोटे के प्रति बड़े की नफरत बढ़ेगी.

बड़े बच्चे को व्यस्त रखने के लिए जरूरी है कि कुछ काम उसे भी करने दें. जैसे अपने कपड़ों की तह लगाना, जूते-चप्पल जगह पर रखना, या किसी की मदद लेना. ऐसा करने पर बच्चे को आपका साथ भी मिलेगा और वह कामकाज में भी मदद करेगा. हां, इस बीच उसे शाबासी जरूर दीजिए ताकि उसे लगे कि अभी भी उसका महत्व है और वह मम्मी-पापा की मदद कर रहा है. साथ ही बच्चे को लगेगा कि उसके भाई के कारण उसका महत्व कम नहीं हो रहा है.

कमरे में बच्चे के साथ का फ्रेम किया हुआ फोटो लगाएं. इससे बच्चे को खुशी होगी और उसमें अपनेपन का भाव जागेगा. ध्यान रखें कि बच्चों का अपनी चीज पर पूरा हक हो. वरना आगे चलकर उनमें बंटवारे का भाव जागेगा.