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भारत को 15 अगस्त 1947 की रात 12 बजे ही आजादी क्यों मिली?

1757 में पलासी के युद्ध के बाद ब्रिटिश भारत में राजनीतिक सत्ता जीत गए और यही वो समय था जब अंग्रेज भारत आए और करीब 200 साल तक राज किया.

अंग्रेजों से एक लंबी लड़ाई के बाद भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली. आजादी मिलते ही पूरे भारतीयों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी. भारत का प्रत्येक नागरिक खुश था कि लंबे जद्दोजहद और हजारों लोगों के बलिदान के बाद भारत के आजादी नसीब हुई. हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. 15 अगस्त 1947 की रात 12 बजे भारत आजाद हुआ था. लेकिन दोस्तों क्या आप इस बात को जानते हैं कि भारत को 15 अगस्त 1947 की रात 12 बजे ही आजादी क्यों मिली? नहीं जानते तो आइए आज हम आपको इसके बारे में बता देते हैं लेकिन दोस्तों, उससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो नए अपडेट्स पाने के लिए जल्द से जल्द सब्सक्राइब कर लें. तो आइए शुरू करते हैं...

1757 में पलासी के युद्ध के बाद ब्रिटिश भारत में राजनीतिक सत्ता जीत गए और यही वो समय था जब अंग्रेज भारत आए और करीब 200 साल तक राज किया. 1848 में लाॅर्ड डलहौजी के कार्यकाल के दौरान यहां उनका शासन स्थापित हुआ. उत्तर-पश्चिमी भारत अंग्रेजों के निशाने पर सबसे पहले रहा और 1856 तक उन्होंने अपना मजबूत अधिकार स्थापित कर लिया. 19वीं सदी में अंग्रेजों ने अपने शासन में सबसे उंचाई को छुआ. नाराज और असंतुष्ट स्थानीय शासकों, किसानों और बेरोजगार सैनिकों ने विद्रोह कर दिया, जिसे आमतौर पर ‘1857 का विद्रोह’ या ‘1857 के गदर’ के तौर पर जाना जाता है.

एक साल में ही अंग्रेजों ने 1857 के विद्रोह पर काबू पा लिया था और इस समय ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत हुआ और कई नई नीतियों के साथ ब्रिटिश सरकार का उदय हुआ. महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी के तौर पर घोषित किया गया. राजा राम मोहन राय, बंकिम चंद्र और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे सुधारक पटल पर उभरे और उन्होंने भारतीयों के हक की लड़ाई लड़ी. उनका प्रमुख लक्ष्य एकजुट होकर विदेशी शासन के खिलाफ लड़ना था.

आजादी की लड़ाई में भारत छोड़ो आंदोलन का काफी मुख्य योगदान रहा. अगस्त 1942 में गांधीजी ने इस आंदोलन को शुरू किया. इसका लक्ष्य ब्रिटिश शासन से पूरी तरह आजादी हासिल करना था और यह ‘करो या मरो’ की स्थिति के रूप में सामने आया. तोड़फोड़ और हिंसक घटनाओं की कई वारदातें सामने आईं. अंत में सुभाष चंद्र बोस ब्रिटिश हिरासत से भाग गए और इंडियन नेशनल आर्मी का गठन किया. अगस्त 1947 में भारत को शासकों, क्रांतिकारियों और उस समय के नागरिकों की कड़ी मेहनत, त्याग और निस्वार्थता के बाद स्वतंत्रता हासिल हुई.

दोस्तों, गांधीजी के जनांदोलन से देश की जनता आजादी के लिए जागरूक हो गयी थी. वहीं दूसरी तरफ सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज की गतिविधियों ने अंग्रेज शासन की नाक में दम कर रखा था. 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के समय पर अंग्रेजों की आर्थिक हालत बद से बदत्तर हो गयी थी. दूसरे देश तो क्या अंगेज अपने देश पर शासन करने में ही असमर्थ हो गए थे. वहीं 1945 के ब्रिटिश चुनावों में लेबर पार्टी की जीत ने आजादी के रास्ते खोल दिए थे क्योंकि उन्होंने अपने मैनिफेस्टो में भारत जैसी दूसरी इंग्लिश कॉलोनियों को भी आजादी देने की बात कही थी.

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कुछ इतिहासकारों का मानना है कि 15 अगस्त को आजादी का दिन चुनना माउंटबेटन का निजी फैसला था. माउंटबेटन लोगों को यह दिखाना चाहता था कि सब कुछ उसके ही नियंत्रण में है. माउंटबेटन 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानता था इसीलिए उसने भारत की आजादी के लिए ये तारीख चुनी थी. 15 अगस्त का दिन माउंटबेटन के हिसाब से शुभ था क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के समय 15 अगस्त, 1945 को जापानी आर्मी ने आत्मसमर्पण किया था और उस समय लॉर्ड माउंटबेटन अलाइड फ़ोर्सेज का कमांडर था. जब लार्ड माउंटबैटन ने आजादी मिलने की तारीख 3 जून, 1948 से 15 अगस्त, 1947 कर दी तो देश के ज्योतिषियों में खलबली मच गयी. उनके अनुसार ये तारीख अमंगल और अपवित्र थी. लार्ड माउंटबैटन को दूसरी तारीखें भी सुझाई गयी थीं, लेकिन वो 15 अगस्त को ही लेकर अडिग थे. 

खैर, इसके बाद ज्योतिषियों ने एक उपाय निकाला. उन्होंने 14 और 15 अगस्त की रात 12 बजे का समय तय किया क्योंकि अंग्रेजों के हिसाब से दिन 12 AM पर शुरू होता है लेकिन हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से सूर्योदय पर दिन शुरू होता है. सिर्फ यहीं नहीं, उन्होंने पंडिज जवाहरलाल नेहरू जी को ये भी कहा था कि उन्हें अपनी आजादी की स्पीच अभिजीत मुहूर्त में 11:51 PM से 12:39 AM के बीच ही देनी होगी. इसमें एक और शर्त ये भी थी कि नेहरू जी को अपनी स्पीच रात 12 बजे तक खत्म कर देनी होगी जिसके बाद शंखनाद किया जाएगा, जो एक नए देश के जन्म की गूंज दुनिया तक पहुंचाएगा.

इसके बाद ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में Indian Independence Bill को पेश किया गया. वह 4 जुलाई 1947 का दिन था. इस बिल में भारत के बंटवारे और पाकिस्तान के बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया था. यह बिल 18 जुलाई 1947 को स्वीकारा गया और 14 अगस्त को बंटवारे के बाद 15 अगस्त 1947 को मध्यरात्रि 12 बजे भारत की आजादी की घोषणा की गई.

आजादी के लिए 15 अगस्‍त की तारीख मुकम्‍मल होने के बाद 14 अगस्‍त की रात 11 बजे संसद की कार्यवाही शुरू की गई. वंदे मातरम से शुरू हुई कार्यवाही में शहीदों के लिए 1 मिनट का मौन रखा गया. करीब एक घंटे सभी बिंदुओं पर चर्चा होने के बाद 14 अगस्‍त की रात को पंडित नेहरू ने अपना ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ सुनाना शुरू किया. वो एक ऐसी रात थी जब देश सोया तो था गुलाम भारत में पर नींद खुली आजादी की नई सुबह के साथ. अगले दिन जब सुबह हुई तो देश अंग्रेजों की 200 साल की गुलामी से आजाद हो चुका था. देश में चारों ओर जश्‍न का माहौल था. दिल्‍ली में पार्लियामेंट स्‍ट्रीट और चांदनी चौक को दुल्‍हन की तरह सजाया गया था. वहीं पूरे देश में जश्न का माहौल था.