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कुछ लोग बाएं हाथ का इस्तेमाल क्यों करते हैं?

लेफ्ट हैंडेड लोगों का आईक्यू लेवल ज्यादा होता है. न्यूयॉर्क की सेंट लॉरेंस यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक दायें हाथ के लोगों के मुकाबले बायें हाथ वालों का आईक्यू लेवल 140 से अधिक होता है.

बचपन में अक्सर देखा होगा कि बाएं हाथ से काम करने पर पैरंट्स मना करते हैं. उनका कहना होता है कि बाएं हाथ से काम करना शुभ नहीं होता. कई बार तो इसी दबाव में बच्चे बायां हाथ ज्यादा सक्रिय होने के बाद भी दाएं हाथ से काम करने को मजबूर होते हैं. हालांकि बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि लेफ्ट हैंडर या राइट हैंडर होना शरीर की आम प्रक्रिया है जो जेनेटिक, लर्निंग थिओरी और मस्तिष्क की बनावट के साथ दूसरे कुछ कारणों पर निर्भर है. कोई लेफ्ट हैंडर क्यों होता है? क्या यह नॉर्मल नहीं है? आइए आज हम इसी टॉपिक पर बात करेंगे... लेकिन दोस्तों उससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जल्द सब्सक्राइब कर लें... तो आइए शुरू करते हैं.

बाएं का मतलब हमेशा निगेटिव रहा है. हर बुरी और गंदी चीज को बाएं से जोड़ते हैं. और इसीलिए बाएं से जुड़ी हर चीज का अस्तित्व या तो होता ही नहीं है. या न के बराबर होता है. और ये तो हमारे कल्चर में साफ-साफ दिखाई देता है. बाएं हाथ से किया गया काम शैतान का होता है. और हर अच्छी चीज दाहिने हाथ से होती है. पूजा भी दाएं हाथ से की जाती है. किसी दुकानदार को सुबह बोहनी करानी होती है तो वह भी बाएं हाथ पैसे नहीं लेता. कहता है कि दाएं हाथ से पैसे दो. अब दुनिया में ज्यादा लोग दाहिने हाथ से काम करते हैं, तो दाहिने हाथ को ही सबसे ज्यादा शुद्ध मान लिया गया. इस दुनिया में करीब 87 फीसदी लोग राइट हैंडर होते हैं, 10 फीसदी लोग लेफ्ट हैंडर और बाकी 3 फीसदी के दोनों हाथ अलग-अलग काम के लिए सक्रिय होते हैं. हालांकि जो लोग केवल लेफ्ट हैंडर होते हैं उन्हें थोड़ा अलग माना जाता है. लेफ्ट हैंड का इस्तेमाल करने वाले लोग ज्यादा प्रतिभावान होते हैं. कई दिग्गज भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं. जैसे- महात्मा गांधी, बराक ओबामा, अमिताभ बच्चन, बिल गेट्स, रतन टाटा, सौरभ गांगुली, सचिन तेंदुलकर, निकोल किडमैन, एंजेलीना जॉली, करण जौहर. हालांकि इस मसले पर मुख्य रूप से तीन थिओरी पर विशेषज्ञों ने चर्चा की.

पहली थिओरी मस्तिष्क की संरचना पर निर्भर है. यह थिओरी कहती है कि आपका दिमाग जैसा कमांड देगा, आप उस हिसाब से काम करेंगे. अगर आपका दिमाग लेफ्ट हैंड से काम करने के लिए कहता है तो आप लेफ्ट हैंड से शानदार तरीके से काम कर सकते हैं. दिमाग दो भागों में बंटा हुआ है. बायां भाग और दायां भाग. मेडिकल के क्षेत्र में यह साफ है कि बायां भाग शरीर के सीधे तरफ यानी दाईं ओर के हिस्से को संचालित करता है और दायां भाग शरीर के बाएं ओर के हिस्से को नियंत्रित करता है. इसका मतलब यह हुआ कि जिन लोगों में मस्तिष्क का बायां हिस्सा ज्यादा सक्रिय होता है, उनके शरीर के दाहिने हिस्से यानी दायां हाथ, दायां पैर और यहां तक कि दाहिनी आंख ज्यादा सक्रियता से काम करते हैं. ऐसा ही दिमाग के दाएं हिस्से पर भी निर्भर होता है.

दूसरी थिओरी जेनेटिक पर आधारित है. इसके तरह गर्भ में ही तय हो जाता है कि आप राइट हैंडर होंगे या लेफ्ट हेंडर. लेंफ्ट हेंडर होने के पीछे जेनेटिक कारण प्रमुख तौर पर समझ में आता है. कुछ स्टडीज में यह बात साबित हो चुक है कि किसी का राइट हैंडर या लेफ्ट हैंडर होना मां के गर्भ में ही निर्धारित हो जाता है. उसे अपने पैरंट्स से एक खास तरह का जीन विरासत में मिला होता है. इसे लेफ्ट हैंडर जीन कह सकते हैं. हालांकि इस जीन के पीछे क्या कारण हैं, इस पर अभी रिसर्च जारी है.

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तीसरी थिओरी लर्निंग और सामाजिक माहौल पर आधारित है. लर्निंग और सामाजिक माहौल में रहकर भी बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं. इसी सीखने की प्रक्रिया में आपको किसी हाथ का इस्तेमाल करना है यह भी शामिल रहता है. बहुत से बच्चे दाएं हाथ से काम करने लगते हैं. धीरे-धीरे उनका यही हाथ ज्यादा सक्रिय हो जाता है. इसमें एक और उदाहरण भी है कि बच्चा अपने किसी पसंदीदा शख्स को देखकर बाएं हाथ का इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है. मसलन ब्रायन लारा या युवराज सिंह लेफ्ट हैंडर बल्लेबाज हैं. अगर उन्हें कोई बच्चा उन्हें पसंद करता है तो उन्हीं की तरह बैटिंग करना चाहेगा. बाएं हाथ से काम करना चाहेगा. ऐसा करते करते वह आदी हो जाता है. ऐसे में आप किस माहौल में रह रहे हैं और बढ़े हो रहे हैं यह भी काफी मायने रखता है.

इन तीन थिओरी को जान कर आप इस बात को तो समझ ही गए होंगे कि कोई लोग लेफ्ट हैंडर या राइट हैंडर क्यों होते हैं. लेकिन दुनिया में बाएं हाथ का इस्तेमाल करने वालों की तादाद पूरी आबादी में बेहद कम होती है.

हालांकि लेफ्ट हैंडर लोगों की कुछ खूबियों भी होती है.
लेफ्ट हैंडेड लोगों का आईक्यू लेवल ज्यादा होता है. न्यूयॉर्क की सेंट लॉरेंस यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक दायें हाथ के लोगों के मुकाबले बायें हाथ वालों का आईक्यू लेवल 140 से अधिक होता है.लेफ्ट हैंड को काम में लेने वालों के हाथों में गजब की तेजी होती है. लेफ्टी शख्स राइटी शख्स की तुलना में स्ट्रोक जैसी समस्या से जल्दी उबरने की क्षमता रखते हैं. वे तेजी से बदलती आवाजों को ज्यादा आसानी से सुन सकते हैं. लेफ्टी पैसा कमाने और खर्च करने के मामले में भी राइट हैडेंड लोगों से आगे रहते हैं.

हालिंक लेफ्टी को कुछ नुकसान भी उठाना पड़ता है.
आमतौर पर कंप्यूटर का माउस राइट साइड पर ही होता है और लेफ्ट हैंडेड लोगों को इसे हर बार अपने हिसाब से लेफ्ट की ओर करना पड़ता है. लेफ्ट हेडेंड लोग किसी और इंसान से हाथ मिलाने से पहले सोच में पड़ जाते है और कई बार तो आदतन लेफ्ट हेंड ही आगे बढ़ा देते हैं. किसी के साथ अगल-बगल बैठकर खाना खाते हुए बगल वाले से हाथ टकराने की समस्या आपको और साथ वाले को परेशान करती है. टचस्क्रीन मोबाइल या आईपैड पर टाइप करना आसान नहीं होता.

हालांकि रिसर्चर आज भी ये पता लगाने की कोशिश में हैं कि हमारे डीएनए का कौन सा हिस्सा इस बात के लिए उकसाता है कि हम दाएं या बाएं हाथ का इस्तेमाल ज्यादा करें. लेकिन जवाब आज भी किसी के पास नहीं है.