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VVIP और VIP क्या होता है?

इसके अलावा प्रशासनिक खेमें में भी कई लोगों को वीवीआईपी और वीआईपी के तौर पर देखा जाता है. इनमें आईएएस, आईपीएस, आईसीएस, आईआरएस अधिकारी इनमें शामिल है.

हम कई बार वीआईपी या वीवीआईपी जैसे शब्द सुनते हैं. लेकिन कई लोगों को इन दोनों शब्दों का मतलब नहीं पता है. दरअसल, इन दोनों शब्दों में ज्यादा फर्क नहीं है. हालांकि किसी शख्स की हैसियत दिखाने के लिए ये दोनों शब्द ही काफी है. दोस्तों वीआईपी से मतलब किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से होता है. जबकि वीवीआईपी का मतलब बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति के लिए होता है. कोई व्यक्ति कितना ज्यादा प्रभावशाली है इसका अंदाजा वीआईपी और वीवीआईपी शब्द से ही लगाया जा सकता है. तो आइए दोस्तों आज हम आपको इन शब्दों के बारे में डिटेल में बता देते हैं. लेकिन इससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो नए अपडेट पाने के लिए जल्दी से सब्सक्राइब करें. तो आइए दोस्तों आइए शुरू करते हैं...

दोस्तों एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में VIP को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. वहीं एक VIP से ज्यादा प्रभावशाली और अहम व्यक्ति VVIP के तौर पर देखा जाता है. हालांकि लोग दावा करते हैं कि सभी समान हैं. सभी को समान अधिकार हासिल. लेकिन इस मामले की सच्चाई यह है कि सभी समान नहीं हैं. वीआईपी महत्वपूर्ण इंसानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जबकि वीवीआईपी बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति के लिए इस्तेमाल में लिया जाता है. दोस्तों वीआईपी की फुल फॉर्म Very Important Person है तो वहीं vvip का पूरा नाम  Very Very Important Person है. दोनों की फुल फॉर्म से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया जाता होगा. वीआईपी को एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. तो वहीं VVIP एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसे VIP से भी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है.

वीआईपी और वीवीआईपी को कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जाता है. इनमें महत्वपूर्ण माने जाने के पीछे दो कारण काफी ज्यादा मायने रखते हैं. पहला है कि अगर आपके पास बेशुमार दौलत है तो आप वीवीआईपी और वीआईपी कैटेगरी में आ सकते हैं. वहीं अगर आप किसी अहम पद पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं तो भी आप वीवीआईपी और वीआईपी की कैटगरी में शामिल हो सकते हैं. आम तौर पर व्यापारी, नेता, फिल्मी सितारे, सरकार में मौजूद ऊपरी लेवल के प्रशासनिक अधिकारी इसमें शामिल होते हैं. दोस्तों, अगर आप करोड़पति या अरबपति हैं, तो आप खुद ब खुद ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. एक कहावत भी है कि पैसा बोलता है. तो दोस्तों, वीवीआईपी और वीआईपी होने में भी पैसों की काफी अहम भूमिका रहता है.

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दोस्तों, एक दूसरा कारण यह है कि अगर फिल्म सितारे, सिंगर या ऐसे लोग जिनकी आम जनता के बीच फैन फॉलोइंग है तो वे अपने आप ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं और वीवीआईपी या वीआईपी हो जाते हैं. राजनीतिक दलों से जुड़े लोग, सरकारी कार्यालयों में उच्च स्तर का प्रबंधन या राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री भी इस लिस्ट में शामिल होते हैं.

वीआईपी और वीवीआईपी को अक्सर बेहतर फैसेलिटीज दी जाती है. जो आम लोगों को आसानी से नहीं मिल पाती है. वीआईपी लोगों को बेहतर उत्पाद या सेवाएं दी जाती हैं. किसी कार्यक्रम में वीवीआई और वीआईपी लोगों के लिए अलग से वीआईपी एंट्री डॉर या निजी कार भी हो सकती हैं. निजी कारों को जहां एंट्री गेट तक जाने की इजाजत नहीं होती है तो वीवीआईपी और वीआईपी लोग उसे प्रवेश द्वारों तक ले जा सकते हैं. इसके अलावा वीआईपी और वीवीआईपी एरिया भी बनाए जाते हैं जहां आम लोगों को जाने की इजाजत नहीं होती है.

इसके अलावा सुरक्षा के मामले में भी वीवीआईपी और वीआईपी लोग आम लोगों से काफी आगे होते हैं. आम जनता को जहां सुरक्षा के लिए किसी तरह की प्रोटेक्शन हासिल नहीं होती है तो वहीं वीवीआईपी और वीआईपी लोगों के पास अलग से बॉडीगार्ड भी होते हैं. ये बॉडीगार्ड हमेशा वीवीआईपी और वीआईपी लोगों के साथ रहते हैं और उनकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं.

दोस्तों, वीवीआईपी को आमतौर पर वीआईपी से भी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए वीवीआईपी शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर वीआईपी से कम किया जाता है. यह आमतौर पर सुरक्षा के संदर्भ में उपयोग किया जाता है. सुरक्षा के मामले में वीवीआईपी हमेशा आगे रहता है. वीवीआईपी को वीआईपी की तुलना में ज्यादा सुरक्षा प्रदान की जाती है.

भारत में सरकारी खेमें के लोगों को ज्यादातर वीवीआईपी और वीआईपी के रूप में जाना जाता है. अगर सरकारी खेमे की बात करें तो भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, राज्यसभा-लोकसभा और विधानसभाओं के अध्यक्ष, सांसद, विधायक, विधान पार्षद, निगम पार्षदों को वीवीआईपी और वीआईपी के तौर पर देखा जाता है. वहीं राजनीतिक पार्टियों के बड़े नेता भी इस कैटेगरी में आते हैं.

इसके अलावा प्रशासनिक खेमें में भी कई लोगों को वीवीआईपी और वीआईपी के तौर पर देखा जाता है. इनमें आईएएस, आईपीएस, आईसीएस, आईआरएस अधिकारी इनमें शामिल है. वहीं मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीश भी वीवीआईपी और वीआईपी के तौर पर देखे जाते हैं. इसके अलावा फिल्मी कलाकार, सेलिब्रिटी या कोई ऐसा इंसान जिसकी फैन फोलॉइंग काफी ज्यादा है, वो भी वीवीआईपी और वीआईपी की कैटेगरी में आते हैं.

हालांकि दोस्तों, वीआईपी संस्कृति के कारण आम लोगों को अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके कारण आम लोगों को होने वाली दिक्कतों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार का कहना है कि देश में किसी को भी वीआईपी या वीवीआईपी का दर्जा देने के संबंध में कोई सूची तैयार नहीं की जाती बल्कि किसी भी व्यक्ति को खतरों की प्रकृति के आधार पर सुरक्षा प्रदान की जाती है. भारत में वीवीआईपी और वीआईपी लोगों को चार अलग-अलग कैटेगरी में सुरक्षा दी जाती है. इनमें जेड प्लस (Z+), जेड (Z), वाई (Y) और एक्स (X) कैटेगरी की सुरक्षा होती है.

वहीं दोस्तों वीवीआईपी लोगों के आने-जाने के कारण आम लोगों को यातायात संबंधी और दूसरी कई समस्याओं का मुद्दा संसद में भी उठ चुका है. दरअसल, कई बार वीवीआईपी रूट के चलते आम जनता को रोक दिया जाता है. जिसके कारण काफी बार यातायात बाधित होता है और इससे लोगों को घंटों ट्रैफिक में खड़े रहना पड़ जाता है.