क्या चल रहा है ?
टूरिज्म के लिहाज से बिहार का गया क्यों बन चुका है इतना खास? | घर बैठकर आसानी से कैसे बुक करें फ्लाइट टिकट?... | घर बैठकर ऑनलाइन कैसे बुक करें रेल टिकट? | जानिए 2019 Honda Activa 125 कैसी है? | BCA-MCA करने से क्या फायदा है? | कुछ लोग बाएं हाथ का इस्तेमाल क्यों करते हैं? | क्या है परिवहन से जुड़ी हाइपरलूप तकनीक... | बॉलीवुड को मिली दूसरी लता मंगेशकर, गरीबी में कुछ ऐसी थी रानू मंडल की जिंदगी | क्या है 5G तकनीक? कैसे करती है काम? | सिर्फ 5 लाख रुपये से CCD के मालिक सिद्धार्थ ने कैसे खड़ा किया अरबों का कारोबार? | पाकिस्तानी दुश्मन के हाथ की घड़ी का वक्त भी देख लेगा भारत का ये सैटेलाइट | अनुच्छेद 370: अमित शाह ने इस बड़े कारण से लद्दाख को कश्मीर से अलग किया? | प्रधानमंत्री 15 अगस्त को लाल किले पर ही क्यों फहराते हैं तिरंगा? | भारत को 15 अगस्त 1947 की रात 12 बजे ही आजादी क्यों मिली? | पाकिस्तान 15 अगस्त को आजाद हुआ लेकिन 14 अगस्त का क्यों मनाता है स्वतंत्रता दिवस? | बिहार के रवीश कुमार ने नरेंद्र मोदी की बोलती की बंद! मिला रेमन मैग्सेसे अवार्ड | चांद पर एलियन का पता लगाएगा भारत का चंद्रयान-2? | चंद्रयान-2: अगर भारत को चांद पर मिली ये चीज तो दुनिया पर करेगा राज | लिफ्ट से चांद पर पहुंचना होगा आसान, चंद्रयान जैसे मिशन की भी जरूरत नहीं? | क्या है धारा 370? जम्मू कश्मीर से मोदी सरकार ने क्यों हटा दी? |

क्या है परिवहन से जुड़ी हाइपरलूप तकनीक...

इस तकनीक में विशेष प्रकार से डिजाइन किए गए कैप्सूल या पॉड्स का प्रयोग किया जाएगा. इन कैप्सूल्स और पॉड्स को एक पारदर्शी ट्यूब पाइप के भीतर उच्च वेग से संचालित किया जाएगा.

परिवहन के क्षेत्र में हर वक्त कुछ न कुछ नया देखने को मिल जाता है. जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है वैसे-वैसे परिवहन का क्षेत्र भी लगातार तेजी दिखा रहा है. ऐसे में परिवहन के क्षेत्र में ही एक नया कॉन्सेप्ट आया है. इस कॉन्सेप्ट का नाम हाइपरलूप है. बहुत से लोग इस कॉन्सेप्ट को नई जानते हैं लेकिन ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वक्त में इसकी काफी प्रगति होने वाली है. तो आइए दोस्तों हम आज आपसे हाइपरलूप के बारे में बात करते हैं. लेकिन उससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जल्दी अपडेट पाने के लिए जल्द से जल्द सब्सक्राइब कर लें. तो आइए दोस्तों शुरू करते हैं.

दोस्तों, परिवहन के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले हाइपरलूप का कॉन्सेप्ट ‘एलन मस्क’ ने दिया. एलन मस्क टेस्ला के चीफ एग्जिक्यूटिव और स्पेस-एक्स के संस्थापक हैं. उन्होंने इसे ‘परिवहन का पांचवां मोड़’ भी बताया. इस तकनीक को हाइपरलूप इसलिए कहा गया क्योंकि इसमें परिवहन एक लूप के माध्यम से होगा. जिसकी स्पीड बहुत ज्यादा होगी. माना जा रहा है कि इसकी गति हवाई जहाज की गति से भी तेज होगी यानी 600-700 मील प्रति घंटा.

लेकिन कुछ लोग नहीं जानते हैं कि ये तकनीक कैसे काम करती है. दोस्तों, इस तकनीक में विशेष प्रकार से डिजाइन किए गए कैप्सूल या पॉड्स का प्रयोग किया जाएगा. इन कैप्सूल्स और पॉड्स को एक पारदर्शी ट्यूब पाइप के भीतर उच्च वेग से संचालित किया जाएगा. परिवहन की इस तकनीक में बड़े-बड़े पाइपों के अंदर वैक्यूम जैसा माहौल तैयार किया जाएगा और वायु की अनुपस्थिति में पोड जैसे वाहन में बैठकर 1000-1300 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से यात्रा की जा सकेगी.

इस परिवहन तकनीक में पॉड्स को जमीन के ऊपर बड़े-बड़े पाइपों में इलेक्ट्रिकल चुम्बक पर चलाया जायेगा और चुम्बकीय प्रभाव से ये पॉड्स ट्रैक से कुछ ऊपर उठ जाएंगे जिससे गति ज्यादा हो जाएगी और घर्षण कम होगा. इसमें प्रतिरोध और घर्षण पैदा करने वाली चीजों का अभाव होगा जिससे इसकी गति तेज होने में मदद मिलेगी. वहीं दोस्तों सवाल यह भी उठता है कि दुनिया के किन देशों में इस तकनीक का उपयोग किया जाता है तो दोस्तों, दुनिया के बहुत से विकसित देश इस हाइपरलूप परिवहन प्रणाली को अपनाने के लिए आगे आए हैं. इनमें अमेरिका, कनाडा और सऊदी अरब शामिल है. इन देशों में ‘हाइपरलूप वन’ नामक कंपनी इस परिकल्पना को साकार रूप देने के काम में जुटी हुई है.

दोस्तों, अगर आप किसी स्पेशल टॉपिक पर कोई वीडियो देखना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर टॉपिक का नाम जरूर बताएं.

दोस्तों, मुसाफिरों की सहूलियत के लिए भारत में जल्द हाईपरलूप तकनीक शुरू होने वाली है. जी हां दोस्तों, अब भारत में भी परिवहन के लिए आने वाले वक्त में हाइपरलूप्स का इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकेगा. वर्जिन हाइपरलूप-1 ने काफी लम्बे समय तक एक कॉन्टैस्ट को चलाने के बाद 10 उन देशों को सिलैक्ट किया है जहां हाइपरलूप तकनीक शुरू की जाएगी. इनमें मैक्सिको, भारत, अमरीका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा आदि शामिल हैं. इन देशों में 200 मील यानी लगभग 321 किलोमीटर से 700 मील यानी लगभग 1126 किलोमीटर तक की हाइपरलूप ट्यूब्स बिछाई जाएंगी. 

कम्पनी इन सब में से भारत को सबसे ज्यादा प्रायोरिटी दे रही है. दरअसल, इसके पीछा का कारण ये हो सकता है कि भारत की आबादी बहुत और यहां ता क्षेत्रफल भी काफी है. वर्जिन हाइपरलूप-1 के जरिए भारत में की गई फिजिबिलिटी स्टडी के मुताबिक मुंबई, बैंगलोर, पुणे और नागपुर में भी हाइपरलूप तकनीक को शुरू किया जा सकता है.इसके अलावा दोस्तों, हाइपरलूप वन ने वर्जन ग्रुप के रिचर्ड ब्रैनसन को इनवैस्टर बनने के बाद कम्पनी का नाम वर्जिन हाइपरलूप वन में बदल लिया है. उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो अगर हाईपरलूप वन मुंबई और पुणे के बीच शुरू की जाए तो इससे महज 14 मिनटों में रास्ता तय किया जा सकेगा जिसे अब एक कार के जरिए 3 घंटों में पूरा किया जाता है.

इससे पहले 7 सितम्बर को हाइपरलूप वन तकनीक को सबसे पहले भारत के दक्षिण पूर्वी राज्य आंध्र प्रदेश के दो शहरों अमरावती और विजयवाड़ा के बीच शुरू करने की पुष्टि की गई है. यह तकनीक इन दोनों शहरों में मौजूद सिटी सैंटर्स को आपस में कनैक्ट कर देगी. जिसके कारण दोनों शहरों के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी और वक्त क लगेगा. इन शहरों की दूरी 42.8 किलोमीटर है जहां सफर करने में यात्रियों को कम-से-कम 1 घंटा 10 मिनट का समय लगता है. लेकिन इस तकनीक के आने के बाद मुसाफिर महज 6 मिनटों में इन शहरों के बीच की दूरी को पार कर सकेंगे. इस डील को अमरीकी रिसर्च कम्पनी हाईपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टैक्नोलॉजी ने आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डिवैल्पमैंट बोर्ड ऑफ इंडिया के साथ साइन किया है. फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि इसके लिए कितने पैसों की पेशकश आंध्र प्रदेश सरकार ने की है. लेकिन इतनी आधुनिक तकनीक को भारत में लाना ही एक बड़ी उपलब्धि है.

दोस्तों हाइपरलूप यातायात की सबसे बेहतर उच्च गति परिवहन प्रणाली है. इस तकनीक में एक पैसेंजर पोड को लो प्रैशर ट्यूब में बिजली की सप्लाई की जाती है और मैग्नैटिक लीवीटेशन की मदद से पैसेंजर पोड आगे की ओर स्पीड पकडना शुरू हो जाता है. अमरीका के नेवादा रेगिस्तान में खास बनाए गए 500 मीटर के ट्रैक पर सितम्बर महीने में टैस्ट किया गया था जिसमें इस ट्रैक पर चलने वाले XP-1 नामक पैसेंजर पोड ने 310 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड तक पहुंच कर एक नया रिकार्ड कायम किया था. उम्मीद है कि ऐसे उच्च गति परिवहन प्रणाली के भारत में आने से देश के अन्य राज्यों में भी इसके लिए संभावनाओं को तलाशा जा सकेगा.

दोस्तों, हाइपरलूप भविष्य में हमारे यातायात का साधन होगा. इसकी मदद से हम अभी के मुकाबले काफी तेज और कम कीमत में आवागमन कर सकेंगे. अभी वर्तमान समय में सबसे तेज यातायात का साधन हमारे पास हवाईजहाज है जो करीब 900 km/hr की गति से चलता है. उसके बाद बुलेट ट्रेन है जो 500 km/hr पर चलती है। जबकि हाइपरलूप की शुरुआती गति होगी 900 से 1200 किलोमीटर प्रति घंटा। जो कि एक बुलेट ट्रेन से भी दुगना है.