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खुफिया एजेंसी RAW के कुछ खास ऑपरेशन

RAW यानि Research And Analysis Wing की स्थापना 21 सितंबर, 1968 को की गई थी। जिसका मकसद देश के खिलाफ होने वाली साजिशों को खतम करना और आतंकवादी गतिविधियों को रोकना है। RAW का मुख्यालय नई दिल्ली में है।

इससे पहले की हम भारत की खुफिया संस्था रॉ के कुछ खास ऑपरेशन के बारे में आप सभी को बताए, उससे पहले इस अंतरराष्ट्रीय गुप्तचर संस्था के बारे में कुछ तथ्यों को जान लेते है। RAW यानि Research And Analysis Wing की स्थापना 21 सितंबर, 1968 को की गई थी। जिसका मकसद देश के खिलाफ होने वाली साजिशों को खतम करना और आतंकवादी गतिविधियों को रोकना है। RAW का मुख्यालय नई दिल्ली में है। रॉ को लेकर एक खास बात यह है कि संसद को लेकर इसकी कोई जबावदेह नहीं है। इसकी जवाबदेही सिर्फ प्रधानमंत्री और जॉइंट इंटेलिजेंस कमिटी को लेकर है। तो चलिए अब ज्यादा देर न करते हुए बात करते है रॉ के कुछ खास और खुफिया ऑपरेशन के बारे में।

  1. ऑपरेशन चाणक्य: जी, हाँ इस ऑपरेशन का नाम ही ‘ऑपरेशन चाणक्य’ रख दिया गया था। चाणक्य की 'फू्ट डालो और राज करो' नीति के आधार पर RAW ने कश्मीर में शांति और अलगाववादियों से निपटने का एक रास्ता तैयार किया था। रॉ ने कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अपने एक एजेंट को ISI के बीच उतार दिया था। जिसने उनके बीच फूट डालने का काम किया। साथ ही साथ उनके बीच रहकर सबूत भी जमा किए। उसकी कोशिश से हुआ ये कि ISI के लोगों के बीच सच में फूट पड़ गई, और उनके कुछ एजेंट भारत के समर्थन में आ गए थे।

 

  1. ये ऑपरेशन उस वक़्त का है जब राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री हुआ करते थे। RAW ने अपनी सूझ-बूझ के दम पर उस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री भजनलाल को न्यूयॉर्क में मरने से बचाया था। दरअसल, उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भजनलाल US में अपने इलाज हेतु प्रधानमंत्री से यात्रा के लिए permission मांगी थी। जोकि उन्हें मिल भी गई और साथ ही उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एक रॉ एजेंट मीरचंदानी को दी गई। इस रॉ एजेंट ने ही होटल के बाहर कुछ संदिग्ध लोगों को देखा था। जिनको देख उस रॉ एजेंट ने न्यूयॉर्क पुलिस को आगाह किया। जानकारी मिलने पर न्यूयॉर्क पुलिस भी अलर्ट हो गई और तलाशी के बाद उन्होंने 6 आतंकवादियों को गिरफ्तार कर लिया था। उन आतंकवादियों की तलाशी करके उनके पास से स्वचालित हथियार, मुख्यमंत्री भजनलाल की Photo, उनके होटल का Room Number और Hospital के लेआउट प्लान की भी तस्वीरें मिली थीं। तो इस तरह रॉ ने उनके इरादों को नाकामियाब कर दिया था।

 

  1. ऑपरेशन ट्रिडेंट: साल 1971 के युद्ध के दौरान रॉ  ने भारतीय नौसेना की बड़ी मदद की थी। भारतीय नौसेना उस समय पश्चिम और पूर्वी पाकिस्तान दोनों की नौसेना की नाकाबंदी करने की योजना में थी। इस मिशन के लिए तत्कालीन रक्षा मंत्री ने RAW के आर.एन. काओ को invite किया था। उनकी फिर चीफ ऑफ नेवल स्टाफ से मीटिंग हुई थी। योजना के अनुसार अगर युद्ध शुरू हुआ तो भारतीय नौसेना कराची बंदरगाह पर हमला कर देगी। उस समय नौसेना के पास सिर्फ ये जानकारी थी कि पाकिस्तान ने बंदरगाह के entry side पर पहरा देने के लिए पास की ही चट्टानों पर अपनी एक अलग security तैनात कर रखी है।  

 

उसके बारे में अब अधिक जानकारी लेने का risk रॉ ने उठाया और समय-समय पर Bombay से कराची बंदरगाह जाने वाले एक ब्रिटिश इंडिया जहाज की मदद ली। जिसपर कुछ पारसी चिकित्सक जाया करते थे। जो रॉ की मदद करने को तैयार थे। अब एक planning एक अनुसार आर.एन. काओ और रॉ के फोटो प्रयोगशाला के विशेषज्ञ मूर्ती, रॉड और मोरियार्टी के रूप में उस जहाज पर सवार हो गए। डॉक्टर ने उन्हें मरीज के रूप में कराची बंदरगाह तक ले जाने की हिम्मत की और उनके भर्ती करने की व्यवस्था भी की।

 

लेकिन बंदरगाह पर भारतीय यात्रियों की खास पूछताछ हुई, तो पता चला दो यात्री चिकन पॉक्स की बीमारी के चलते जल्दबाजी की वजह से वहां से चले गए। इन सबके बाद जहाज को उन चट्टानों के बीच ले जाया गया, जहां पाकिस्तान की एक security तैनात थी। लेकिन फिर भी रॉ ने वहाँ से टेलीफोटो लेंस की मदद से किलेबंदी और बंदूक माउंटिंग के साथ कई और फोटो लेकर उसे भारतीय नौसेना को दे दिया। अब कुछ महीने बाद जब युद्ध शुरू हुआ तो भारतीय नौसेना पूर्ण रूप से तैयार थी और उसने अपने दुश्मन को बुरी तरह मात दी। जिसका credit raw को जाता है। तो दोस्तों, ये थे रॉ के कुछ कामियाब मिशन।

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