बाघ के बारे में इन रोचक तथ्यों को नहीं जानते होंगे आप

बाघ दिन के ठंडे समय में शिकार करना पसंद करता है. यह जंगली सूअर से लेकर भैंसों तक का शिकार कर लेते हैं. वहीं अगर कभी बाघ को भोजन की कमी महसूस होती है तो छिपकलिया, मेंढक, मगरमच्छ के अलावा मृत जन्तुओं को भी खाना सीख जाते हैं.

'Save The Tiger' ये स्लोगन तो आपने पढ़ा भी होगा या सुना होगा. दरअसल, दुनिया में टाइगर यानी बाघ में लगातार कमी देखी जा रही है. दुनियाभर में अब बस गिनती के बाघ रह गए हैं. बाघ बिल्ली की प्रजाती है लेकिन बाघों के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है. ऐसे में आइए आज हम आपको टाइगर्स के बारे में ज्यादा जानकारियां देते हैं साथ ही एक रिक्वेस्ट भी करते हैं कि आप भी बाघों की सुरक्षा में अपना किसी भी तरह से कुछ-न-कुछ योगदान जरूर दें ताकि बाघ लुप्त न हो जाएं...

दोस्तों बाघ ऊंचाई में लगभग शेर के बराबर होता है. साथ ही इसकी लम्बाई लगभग 9 फीट होती है. इसकी अगली टांगो का घेरा लगभग 2 फीट होता है. बाघ की गर्दन पेड़ के तने के समान मोटी होती है और अगला पंजा बड़ा और भयंकर होता है.

दोस्तों, मादा बाघ गर्भ धारण करने के साढ़े 3 महीने के बाद ही बच्चों को जन्म दे देती है. साथ ही यह 4-6 शिशुओं को एक साथ ही जन्म देती है. बाघ के शिशु जन्म के समय अंधे होते है और वजन 1 से 1.5 किलोग्राम होता है. वहीं शिशु 6 हफ्ते तक माता-पिता पर पुरी तरह निर्भर रहते है. इसके अलावा जब बच्चा बड़ा होकर सात महीने का हो जाता है तो वह खुद शिकार करने के लिए लायक हो जाता है.

दोस्तों, बाघ दिन के ठंडे समय में शिकार करना पसंद करता है. यह जंगली सूअर से लेकर भैंसों तक का शिकार कर लेते हैं. वहीं अगर कभी बाघ को भोजन की कमी महसूस होती है तो छिपकलिया, मेंढक, मगरमच्छ के अलावा मृत जन्तुओं को भी खाना सीख जाते हैं. बाघ औसतन 9 किलोग्राम मांस हर रोज खा लेता है. वहीं साल भर में एक बाघ 45-50 हिरनों का शिकार कर लेता है.

दोस्तों, वैस जो बाघ घने जंगलों में रहना पसंद करते हैं लेकिन ज्यादा गर्मियों में बाघ प्यास से परेशान होकर जंगल से बाहर निकल आते हैं. इस दौरान बाघ किसी जलाशय के निकट झाड़ियो में छिपा रहता है और तो और कभी-कभी गांव के लोगों को भी उठा ले जाता है.

दोस्तों, आपको लगता होगा कि बाघ स्वभाव से काफी हिम्मत वाला होता होगा. लेकिन ऐसा नहीं है. स्वभाव से बाघ डरपोक होता है. जब तक यह घायल नहीं हो जाता या इससे छेड़कानी नहीं की जाती तब तक यह किसी का सामना नहीं करता. हालांकि शारीरिक रूप से बाघ काफी मजबूत होगा है. अपने मुंह में गाय-बैल को दबाकर बाघ ऊंची-ऊंची झाड़ियों को भी आसानी से पार कर लेता है.

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बाघ शेर की तरह पंजे से थप्पड़ नहीं मारता बल्कि दोनों पंजो से शिकार की देह को जकड़ लेता है. जिससे उसके नाखून मांस में गहरे घुस जाते है और तब अपने दांतों से चीरफाड़ करता है. बिल्ली की प्रजाति वाले इस जन्तु को पानी से काफी लगाव होता है. गर्मी में अक्सर बाघ पानी में तैरा करते हैं. 

दोस्तों, बाघ के बच्चों को मां के दूध के अलावा दूसरे भोजन की आवश्यकता भी होती है. इसके लिए बाघ अपने बच्चों को दूसरे जन्तुओं पर शिकार करने की शिक्षा भी देती है. इस दौरान मादा बाघ बिना कारण जीव-जन्तुओ की खूब हत्या करती है. हालांकि इससे बच्चे भी शिकार करना जल्दी सीख जाते है.