चीते के बारे में ये राज आपको स्कूल में भी नहीं पढ़ाए गए होंगे

बिल्ली के खानदान में चीता ऐसा जानवर है, जो काफी बड़ा होता है. उनकी सबसे बड़ी खूबी उनकी तेज रफ्तार होती है. चीते को उसकी रफ्तार के कारण जाना जाता है.

चीता दुनिया का सबसे तेज रफ्तार से दौड़ने वाला जानवर है. ये सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है. पूरी दुनिया में अब सिर्फ अफ्रीका में गिनती के चीते बचे हुए हैं. बाकी दुनिया से ये जानवर विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुका है. चीते के बारे में कई सारी बातें हैं जो सब लोग नहीं जानते हैं. ऐसे में आइए आज जानते हैं चीते के बारे में कुछ रोचक तथ्यों के बारें...

बिल्ली के खानदान में चीता ऐसा जानवर है, जो काफी बड़ा होता है. उनकी सबसे बड़ी खूबी उनकी तेज रफ्तार होती है. चीते को उसकी रफ्तार के कारण जाना जाता है. लोग चीते की रफ्तार को लेकर अलग-अलग दावे करते हैं. हालांकि माना जाता है कि चीता 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है. इसके अलावा चीता जब पूरी ताकत से दौड़ रहा होता है तो सात मीटर तक लंबी छलांग लगा सकता है. 7 मीटर यानी 23 फुट लंबी छलांग. वहीं चीता अपनी रफ्तार तीन सेकेंड के भीतर ही पकड़ सकता है. हालांकि चीते इतनी तेज रफ्तार से ज्यादा देर नहीं दौड़ पाते हैं. उनके पास शिकार के लिए सिर्फ बीस सेकेंड होते हैं.

दोस्तों, चीते के बच्चे बड़ी मुश्किल से जिंदा रहते हैं. जो कि इसके विलुप्त होने की सबसे बड़ी वजह है. एक सर्वे में ये बात भी सामने आ चुकी है कि चीतों के 95 फीसदी बच्चे, वयस्क होने से पहले ही मर जाते हैं. यानी चीते के 100 बच्चों में से पांच ही बड़े होने तक जिंदा रहते हैं.

इसके अलावा कई बड़े जानवर जैसे शेर, लकड़बग्घे, बबून के जरिए चीतों का शिकार किए जाने के कारण भी इनकी संख्या घट रही है. अरब देशों में चीतों के बच्चों को पालने के लिए खरीदा जाता है. इनकी कीमत 10 हजार डॉलर तक पहुंच जाती है. ये भी चीतों की तस्करी और खात्मे की बड़ी वजह है.

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दोस्तों, नर चीते की तुलना में मादा चीते की जिंदगी काफी चुनौती भरी रहती है. उसे औसतन नौ बच्चों को अकेले ही पालना पड़ता है. इसका मतलब ये हुआ कि उसे हर दूसरे रोज शिकार करना ही होगा. वरना वो बच्चों का पेट नहीं भर पाएगी? शिकार के दौरान उसे अपने बच्चों की निगरानी भी करनी पड़ती है, ताकि उन्हें खतरनाक जानवरों से बचाया जा सके. छोटे बच्चों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी मादा चीता के लिए चुनौती होती है.

दोस्तों मादा चीता सिर्फ सेक्स के लिए नर चीते से मिलती है. सेक्स के बाद दोनों फिर से अलग-अलग हो जाते हैं. इस दौरान अगर बच्चे हैं तो उन्हें अपना ख्याल खुद रखना होता है.

दोस्तों, चीता शेर और बाघ की तरह दहाड़ नहीं पाते. वो बिल्लियों की तरह गुर्राते हैं. कई चीतों को भौंकते भी देखा गया है. चीतों के लिए रात में देखना मुश्किल होता है. रात में चीतों की हालत इंसानों जैसी ही होती है. इसीलिए चीते, या तो सुबह के वक्त या दोपहर के बाद शिकार करते हैं. चीतों को पेड पर चढ़ने में भी दिक्कत होती है.