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हर महिला को पता होना चाहिए ये अधिकार

ऑफिस में हुए यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं को रिपोर्ट दर्ज करवाने का पूरा अधिकार है. जिसके बाद फोरन उस इंसान पर कार्यवाही की जाती है.

इन दिनों एक राजनेता ऐसा है जो चौतरफा विवादों से घिरा हुआ है. नाम है आजम खान. उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान अपने विवादित बयानों के लिए हमेशा से सुर्खियों में रहे हैं. अब एक बार फिर आजम खान अपनी जुबान के कारण ही लोगों के निशाने पर हैं और इस बार आजम खान का विवादित बयान संसद से सामने आया है. उन्होंने बीजेपी की महिला सांसद पर ऐसी टिप्पणी की जो पूरी बीजेपी के साथ ही दूसरी महिलाओं को भी नागवार गुजरी. वहीं कामकाजी महिलाओं को अक्सर अपने कार्यक्षेत्र में अश्लील या घटिया टिपण्णियों का सामना करना पड़ जाता है. अक्सर महिलाओं को अपने वर्क प्लेस पर ही छेड़छाड़ का शिकार भी होना पड़ता है. हालांकि कुछ महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती है और शांत रहती है. लेकिन दोस्तों, वर्कप्लेस पर महिलाओं को कुछ विशेषाधिकार मिले होते हैं. कई सारी कामकाजी महिलाएं इन अधिकारों को जानती नहीं है. इन अधिकारों को जानकर महिलाएं वर्क प्लेस पर अपने खिलाफ होने वाली गतिविधियों से लड़ सकती है. आइए जानते हैं महिलाओं के इन अधिकारों के बारे में....

ऑफिस में हुए यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं को रिपोर्ट दर्ज करवाने का पूरा अधिकार है. जिसके बाद फोरन उस इंसान पर कार्यवाही की जाती है. इसके अलावा अपनी पहचान को गोपनीय रखने के लिए वो महिला किसी महिला पुलिस अधिकारी को अकेले बयान दे सकती है. इसके साथ ही सेक्शुअल हैरेसमेंट से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ गाइडलाइंस तय की हैं. इसके तहत महिलाओं को प्रोटेक्ट किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की यह गाइडलाइंस तमाम सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में लागू है. इसके तहत एंप्लॉयर की जिम्मेदारी है कि वह सेक्शुअल हैरेसमेंट के गुनहगार के खिलाफ कार्रवाई करे. वहीं एंप्लॉयर या अन्य जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी है कि वह सेक्शुअल हैरेसमेंट को रोके. सेक्शुअल हैरेसमेंट के दायरे में छेड़छाड़, गलत नीयत से टच करना, सेक्शुअल फेवर की डिमांड या आग्रह करना, महिला सहकर्मी को पॉर्न दिखाना, अन्य तरह से आपत्तिजनक व्यवहार करना या फिर इशारा करना आता है. इन मामलों के अलावा कोई ऐसा ऐक्ट जो आईपीसी के तहत ऑफेंस है उसकी शिकायत महिला कर्मी के जरिए की जाती है तो एंप्लॉयर की ड्यूटी है कि वह इस मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित अथॉरिटी को शिकायत करे.

उत्पीड़न के अलावा भी वर्क प्लेस में महिलाओं को कई अधिकार मिले हैं. जो कि इस प्रकार से है...

समान वेतन का अधिकार
समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मजदूरी की हो तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता. ऐसे में महिलाओं को भी समान वेतन पाने का अधिकार है.

मातृत्व संबंधी अधिकार
कामकाजी महिलाओं के लिए भारत सरकार ने यह कानून बनाया है कि प्रसव के बाद महिला कुछ महीने तक छुट्टी ले सकती है. इस दौरान महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी. इसके अलावा वो अपना काम घर से भी शुरू कर सकती है.

मान-सम्मान का अधिकार
भारतीय कानून के मुताबिक अगर कोई महिलाओं के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसपर भी सख्त कार्यवाही की जाती है. भारतीय कानून के अनुसार हर महिला को उसके सम्मान का पूरा अधिकार है, फिर चाहे वो किसी भी धर्म या देश से हो.