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अगर मोदी को पूर्णबहुमत मिला तो होगा नुकसान? जान लो पूर्णबहुमत की सरकार के घाटे

अगर मोदी को पूर्णबहुमत मिला तो होगा नुकसान? जान लो पूर्णबहुमत की सरकार के घाटे
साल 2014 में भारत में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पूर्णबहुमत की सरकार देखने को मिली थी. अब इस सरकार को पांच साल होने वाले हैं. साथ ही साल 2019 में एक बार फिर से आम चुनाव होने वाले हैं. पूर्णबहुमत की सरकार को यूं तो स्थायी और मजबूत सरकार के तौर पर देखा जाता है, क्योंकि इस सरकार के पास विधेयक से लेकर कई नई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए किसी दूसरे से राय नहीं लेनी पड़ती है. ऐसे में पूर्णबहुमत की सरकार काफी मजबूत मानी जाती है. लेकिन पूर्णबहुमत की सरकार के कई नुकसान भी हैं जिन्हें लोग नहीं जानते हैं. ऐसे में आइए जान लेते हैं कि अगर देश में फिर से फिर से पूर्णबहुमत की सरकार बनी तो क्या नुकसान देश को हो सकता है..... लेकिन दोस्तों, उससे पहले अगर आप भी कैमरे से अपना वीडियो बनाना चाहते हैं और पूरे दुनिया को अपना हुनर दिखाना चाहते हैं, साथ में अच्छे पैसे भी कमाना चाहते हैं तो हम आपके लिए एक सुनहरा मौका लेकर आए हैं. इसके लिए आपको सिर्फ 30 सेकंड में अपना एक इंट्रोडक्शन वीडियो बनाना होगा, जिसमें आपको अपने बारे में हमें बताना होगा. आप अपना 30 सेकंड का वीडियो बनाकर हमें डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक पर भेज सकते हैं. दोस्तों, जिन प्रतिभागियों का वीडियो सबसे अच्छा होगा, उन्हें हमारी टीम कॉल करेगी और फिर सेलेक्टेड लोग घर बैठे वीडियो बनाकर एक मोटी कमाई कर सकते हैं. तो दोस्तों, देर किस बात की जल्द ही हमें अपना वीडियो डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक पर भेजें. ताकी आप इस मौके से चूक न जाएं. तानाशाही पूर्णबहुमत की सरकार को किसी दूसरे दलों का समर्थन हासिल होने या न होने से कोई ज्यादा दिक्कत नहीं होती है. ऐसे में पूर्णबहुमत की सरकार तानाशाही रवैया अपनाने लगती है. जिसके कारण ये सरकार अपने मन का काम ही करती है. ऐसे में तानाशाही रवैया के लिए पूर्णबहुमत की सरकार सही नहीं है. जबरदस्ती नीतियां थोपना पूर्णबहुमत की सरकार आने से कुछ नीतियां लोगों पर जबरदस्ती थोप दी जाती है. ऐसे में उन नीतियों का पालन करना लोगों की समस्या बन जाता है. इसके कारण भी पूर्णबहुमत की सरकार फायदेमंद नहीं रहती है. दोस्तों, कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं कि आप किसे प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते हैं? क्षेत्रीय दलों की भूमिका पूर्णबहुमत की सरकार आने से क्षेत्रीय दलों की भूमिका न के बराबर हो जाता है. ऐसे में पूर्णबहुमत की सरकार क्षेत्रीय या छोटे दलों की सरकार में भूमिका में कमी लाती है. जिसके कारण छोटे शहरों या गांवों का समस्या आगे तक नहीं पहुंच पाती है. असहमति पर ध्यान नहीं पूर्णबहुमत की सरकार की सरकार कोई कानून या नीति लाती है लेकिन बाकी दल उस पर असहमति जताते हैं तो कई बार पूर्णबहुमत की सरकार उस असहमति पर ध्यान नहीं देती है. ऐसे में  पूर्णबहुमत की सरकार की सरकार कई आपत्तियों के बावजूद वहीं करती है, जो उसे करना है. साथी दलों पर ध्यान नहीं पूर्णबहुमत की सरकार कई बार अपने साथी दलों को नजरअंदाज कर देती है. जिसके कारण उसके साथी दल ही सरकार के विरोध में आवाज निकालते हैं. इसके मद्देनजर भी पूर्णबहुमत की सरकार फायदेमंद नहीं रहती है.