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चंद्रयान-2: इसरो के कदमों में गिरा नासा, मदद की मांगी भीख

नासा ने तो इसरो से आंकड़ों की मांग कर दी है लेकिन भारत आसानी से और इतनी जल्दी अपनी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धि को किसी से साझा नहीं करना वाला है.

भारत इन दिनों महाशक्ति बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है. अलग-अलग क्षेत्रों में भारत के जरिए ऐसे काम किए जा रहे हैं जिसके कारण भारत आज उभर कर दुनिया के सामने आया है. भारत दिनों दिन नई उपलब्धियां भी हासिल कर रहा है, जिसके कारण कई देश तो भारत की इन उपलब्धियों के कारण हैरान परेशान हैं. इन्हीं उपलब्धियों में से एक उपलब्धि भारत ने चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण से भी हासिल की है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग कर दी है. इस लॉन्चिंग के बाद देश के अलावा दुनिया भर के लोगों ने इसरो को इस मिशन के लिए बधाई दी है. हालांकि दूसरे देशों की स्पेश एजेंसियां भारत की इस उपलब्धि से अंदर ही अंदर ही जल भी रही हैं. इनमें नासा का नाम सबसे ऊपर है. जी हां, दोस्तों दुनिया में सबसे मशहूर अंतरिक्ष एजेंसी नासा भारत के चंद्रयान-2 मिशन से बौखलाई हुई है. बौखलाहट के कारण नासा अब इसरो से ही मदद मांग बैठा है. लेकिन नासा ने इसरो से क्या मदद मांगी वो जानने से पहले दोस्तों, अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो नए अपडेट्स पाने के लिए जल्द से जल्द सब्सक्राइब कर लें. आइए शुरू करते हैं.

इसरो के महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-2 ने 22 जुलाई दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी. इसरो चीफ के सिवन ने चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के बाद प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण सफल रहा. यह 48वें दिन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा. के सिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग हमारी सोच से बेहतर रही. इसकी सफल लॉन्चिंग से खुशी है. ये वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत का नतीजा है, इसके लिए सभी वैज्ञानिकों को सैल्यूट. 

हालांकि दोस्तों, अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा भारतीय मिशन चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण पर जलती हुई दिखाई दी और अब नासा ने भारत से मदद की गुहार लगा दी है. चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग के बाद नासा ने इसरो को बधाई दी है. साथ ही नासा ने कहा कि अपने डीप स्‍पेस नेटवर्क के जरिए मिशन के कम्‍यूनिकेशन के लिए सहयोग करने पर हमें गर्व है. वहीं नासा ने मदद की गुहार लगाते हुए इसरो के जरिए चंद्रयान-2 से मिली जानकारियों को साझा करने की मांग कर डाली है. जी हां दोस्तों, आज तक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कोई भी देश नहीं उतरा पाया है. भारत का चंद्रयान-2 दुनिया का ऐसा पहला मिशन है जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा. ऐसे में सब देश अब भारत की ओर हाथ फैलाए खड़े हैं. इनमें सबसे पहला देश अमेरिका है जिसकी स्पेश एजेंसी नासा ने भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो से चंद्रयान-2 से मिली जानकारी की मांग की है. नासा ने कहा है कि चंद्रमा के साउथ पोल से आपको मिलने वाली जानकारी को लेकर हम आशान्वित हैं. जहां हम अर्टेमिस मिशन के जरिए अगले कुछ वर्षों में अपना अंतरिक्ष यात्री भेजने वाले हैं.

दरअसल दोस्तों, नासा कुछ सालों के बाद चांद के साउथ पोल पर स्पेस मिशन भेजने वाला है. ऐसे में नासा भारत के साथ चालाकी करते हुए पहले ही चांद के साउथ पोल की जानकारी भारत से इकट्ठा करना चाहता है. ऐसे में चंद्रयान-2 की जानकारी के लिए नासा इसरो के पैरों में गिर चुका है.

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दोस्तों, नासा ने तो इसरो से आंकड़ों की मांग कर दी है लेकिन भारत आसानी से और इतनी जल्दी अपनी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धि को किसी से साझा नहीं करना वाला है. चंद्रयान-2 से हासिल आंकड़ों का विश्लेषण इसरो के वैज्ञानिक खुद करेंगे. सभी आंकड़े नासा समेत किसी दूसरी विदेशी एजेंसी से साझा नहीं किए जाएंगे. इसरो खुद इन आंकड़ों का विश्लेषण कर कई शोध पत्र प्रकाशित करने की तैयारी में है.

चंद्रयान-2 में इसरो ने विदेशी उपकरणों को शामिल करने से परहेज किया है. इसमें 13 उपकरण भारतीय एजेंसियों के हैं. जबकि एकमात्र लेजर रेट्रोरिफ्लैक्टर ऐरे यानी एलआरए उपकरण नासा का है. एलआरए का काम केवल धरती और चांद के बीच की दूरी का आकलन करना और चंद्रमा पर लैंडर की स्थिति का पता लगाना है. सूत्रों ने कहा कि इस मायने में यह अहम उपकरण नहीं है.

वहीं सूत्रों ने बताया कि एलआरए के आंकड़े भी सीधे नासा को हासिल नहीं होंगे बल्कि इसे इसरो मुहैया कराएगा. चंद्रयान-2 में भेजे जा रहे सभी 14 पेलोड में आठ आर्बिटर में हैं, जबकि लैंडर में चार और रोवर में दो हैं. रोवर चूंकि चांद की सतह पर चलकर कुछ नमूने इकट्ठा करेगा और उनका विश्लेषण कर सीधे इसरो को प्रक्षेपित करेगा. इसलिए रोवर के आंकड़ों को सबसे अहम माना जा रहा है.

वहीं दोस्तों, इसरो ने चंद्रयान-1 से भी सबक लिया है और इस बारा नासा को भारत कोई भी आंकड़े सौंपने से पहले 100 बार सोचेगा. दरअसल चंद्रयान-1 में लगे नासा के उपकरण मून मिनरोलॉजी मैपर यानी एम-3 ने चांद पर पानी के संकेत दिए थे. यह आंकड़े इसरो के पास थे और नासा को दिए गए थे. लेकिन नासा ने इसका विश्लेषण कर पानी होने की पुष्टि की. इस प्रकार आंकड़े जुटाने के बावजूद श्रेय नासा को मिल गया और भारत की पीठ पर छुरा घोपा गया. ऐसे में इस बार इसरो पिछली गलती नहीं दोहराने वाला है. जिसके कारण चंद्रयान-2 के आंकड़ों के लिए नासा को इसरो के पैरों में झुकना पड़ेगा.

दोस्तों, भारत के दूसरे चंद्रमा अभियान चंद्रयान-2 को बाहुबली रॉकेट जीएसएलवी-मार्क-3 के साथ सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया. यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का अध्ययन करेगा जोकि अभी तक दुनिया के किसी भी अंतरिक्ष मिशन में नहीं किया गया है. 375 करोड़ रुपये के जियोसिंक्रोनाइज सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-3 रॉकेट ने 3.8 टन वजनी और 603 करोड़ रुपये की कीमत के चंद्रयान-2 को लेकर अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी.

चंद्रयान-2 पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की लगभग 384,400 किमी की यात्रा तय करेगा. भारत की इस सफलता के बाद इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है. इसके साथ ही उन्होंने सभी वैज्ञानिकों की तारीफ भी की.