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चंद्रयान-2 को सीधे चांद पर भेज सकते थे लेकिन बेवकूफ वैज्ञानिक इसे घुमा क्यों रहे हैं?

भारत ने चंद्रयान-2 को सीधा चांद पर नहीं भेजा है. दरअसल, चंद्रयान-2 को धरती के चारों ओर गोल-गोल घुमाने के बाद चांद पर लैंड करवाया जाएगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO के दूसरे मून मिशन Chandrayaan-2 की सफल लॉन्चिंग के बाद पूरी दुनिया भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता से चकित है. सभी देश इस लॉन्चिंग की खुलकर तारीफ कर रहे हैं. दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नजरें अब सिर्फ चंद्रयान-2 पर है क्योंकि चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला है और अभी तक दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं है, जिसमें चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपना कोई यान उतारा हो. अब दक्षिणी ध्रुव से मिलने वाली जानकारी भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. हालांकि दोस्तों भारत ने चंद्रयान-2 को सीधा चांद पर नहीं भेजा है. दरअसल, चंद्रयान-2 को धरती के चारों ओर गोल-गोल घुमाने के बाद चांद पर लैंड करवाया जाएगा. दोस्तों, अब भी कहोगे कि ये क्या बेवकूफी हैं. लेकिन दोस्तों सच यही है. अमेरिका, रूस और चीन चांद पर अपना यान सीधे भेजते हैं लेकिन भारत चांद पर अपने यान को भेजने से पहले धरती के कई चक्कर लगाता है. चंद्रयान-2 के साथ भी ऐसा किया जा रहा है और चंद्रयान-2 को धरती के चक्कर लगवाए जा रहे हैं. लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जा रहा है. आइए जानते हैं लेकिन दोस्तों उससे पहले अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जल्द से जल्द सब्सक्राइब जरूर कर लें. तो आइए शुरू करते हैं...

दोस्तों, चांद तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 को 48 दिनों का वक्त लगेगा. 22 जुलाई को चंद्रयान-2 को लॉन्च किया गया था और तभी से चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा शुरू हो चुकी थी. धरती से चांद तक के सफर में भारत चंद्रयान-2 को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहा है. भारत ने चांद पर सीधे चंद्रयान-2 को नहीं भेजा है. ऐसा नहीं है कि चंद्रयान-2 को सीधे चांद पर नहीं भेजा जा सकते था. चंद्रयान-2 को सीधे चांद पर भी भेजा जा सकता था, लेकिन इसमें काफी ईंधन, मेहनत और तकनीक की जरूरत पड़ती. इसलिए वैज्ञानिक इस इंतजार में है कि चांद पृथ्वी से नजदीक आ जाए. तब चंद्रयान-2 को चांद पर उतारा जाएगा. लॉन्चिंग के 16.23 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 170 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा था. इसरो वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के लॉन्च को लेकर काफी बदलाव किए थे. लेकिन दोस्तों, सवाल उठता है कि आखिर चंद्रयान-2 को सीधे चांद पर भेज सकते थे तो चंद्रयान-2 को वैज्ञानिक इतना घुमा क्यों रहे हैं? क्या वैज्ञानिक पागल हो चुके हैं.

दरअसल, दोस्तों वैज्ञानिक पागल बिल्कुल नहीं हुए हैं. अमेरिका, रूस और चीन की तरह भारत भी चंद्रयान-2 को सीधे चांद पर भेज सकता है. लेकिन इसके लिए ज्यादा ताकतवर रॉकेट की जरूरत पड़ती. साथ ही चंद्रयान-2 में ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ती. इसके लिए उसके आकार को बढ़ाना पड़ता. लेकिन, इसरो वैज्ञानिक चांद को पृथ्वी के चारों तरफ इसलिए घुमा रहे ताकि चांद पृथ्वी के नजदीक आ जाए. पृथ्वी के चारों तरफ पांच चक्कर लगाने के दौरान चंद्रयान-2 चांद के बेहद नजदीक पहुंच जाएगा. उसके बाद चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से वह चांद की तरफ खिंचा चला जाएगा. तब इसरो वैज्ञानिक इसकी गति को नियंत्रित करके इसे चांद पर लैंड कराएंगे. लेकिन दोस्तों, ये इतना भी आसान काम नहीं है.

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दोस्तों, चंद्रयान-2, 22 जुलाई से लेकर 6 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. इसके बाद 14 अगस्त से 20 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा. 20 अगस्त को ही चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद 11 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. फिर 1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा. 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा. लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा.

दोस्तों, चंद्रयान-2 को पहले 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था. लेकिन तकनीकी दिक्कत की वजह से इसे 22 जुलाई को लॉन्च किया गया. जिसके कारण इसमें कई बदलाव भी किए गए. 15 जुलाई की लॉन्चिंग और 22 जुलाई की लॉन्चिंग में कुछ अंतर आए. जिन पर भी एक नजर डाल ली जाए.

दरअसल 22 जुलाई की लॉन्चिंग में पृथ्वी के ऑर्बिट में जाने का समय करीब एक मिनट बढ़ा दिया गया. इसके अलावा पृथ्वी के चारों तरफ अंडाकार चक्कर में भी बदलाव किया गया और इसके एपोजी में 60.4 किमी का अंतर आया. 22 जुलाई की लॉन्चिंग के लिए तय हुआ कि चंद्रयान-2 लॉन्चिंग के बाद पृथ्वी के चारों तरफ अंडाकार कक्षा में चक्कर लगाएगा. इसकी पेरिजी यानी पृथ्वी से कम दूरी 170 किमी और एपोजी यानी पृथ्वी से ज्यादा दूरी 39120 किमी होगी. वहीं 15 जुलाई की लॉन्चिंग में तय था कि चंद्रयान-2 अगर लॉन्च होता तो इसकी पेरिजी 170.06 किमी और एपोजी 39059.60 किमी होती. यानी एपोजी में 60.4 किमी का अंतर लाया गया है. यानी पृथ्वी के चारों तरफ लगने वाला चक्कर कम किया जाएगा.

इसके अलावा चंद्रयान-2 की चांद पर जाने के समय में भी 6 दिन की कटौती की गई. अगर 15 जुलाई को चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक लॉन्च होता तो वह 6 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करता. लेकिन 22 जुलाई की लॉन्चिंग के बाद चंद्रयान-2 को चांद पर पहुंचने में 48 दिन ही लगेंगे. यानी चंद्रयान-2 चांद पर 6 सितंबर को ही पहुंचेगा.

इसके अलावा चंद्रयान-2 की वेलोसिटी में 1.12 मीटर प्रति सेकंड का इजाफा किया गया. चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को लॉन्च होने के बाद चांद की ओर ज्यादा तेजी से जाएगा. अब अंतरिक्ष में इसकी गति 10305.78 मीटर प्रति सेकंड होगी. हालांकि इससे पहले इसकी गति कम थी. 15 जुलाई को अगर चंद्रयान-2 को लॉन्च किया जाता तो यह 10,304.66 मीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की तरफ जाता. यानी इसकी गति में 1.12 मीटर प्रति सेकंड का इजाफा किया गया है.